May 14, 2026

बिलासपुर में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर साइबर ठगी का बड़ा मामला, रिटायर्ड महिला प्रोफेसर से 1.04 करोड़ रुपए की ऑनलाइन ठगी, टेरर फंडिंग का डर दिखाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर पूरी रकम ट्रांसफर कराई गई

Bilaspur में साइबर अपराध का बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसाकर साइबर ठगों ने टेरर फंडिंग में शामिल होने का झूठा आरोप लगाते हुए डराया-धमकाया और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए की भारी-भरकम ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

व्हाट्सएप मैसेज से शुरू हुई पूरी साइबर साजिश
मामले के अनुसार पीड़िता रमन श्रीवास्तव, जो वर्ष 2005 में डीपी विप्र कॉलेज से प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं और वर्तमान में Bilaspur के सिविल लाइन थाना क्षेत्र अंतर्गत शांति नगर, मंगला चौक स्थित रियल हैवेन में निवास करती हैं, उन्हें 20 अप्रैल 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे एक अज्ञात व्हाट्सएप नंबर से संदेश प्राप्त हुआ। इस संदेश में खुद को “संजय PSI” बताने वाले व्यक्ति ने संपर्क स्थापित किया और यहीं से पूरे साइबर फ्रॉड की शुरुआत हुई।

वीडियो कॉल पर धमकी, टेरर फंडिंग का झूठा आरोप
इसके बाद ठगों ने लगातार वीडियो कॉल कर पीड़िता को मानसिक रूप से दबाव में लेना शुरू किया। उन्हें बताया गया कि उनका नाम एक “टेररिस्ट फंडिंग नेटवर्क” से जुड़ा हुआ है और वे अवैध धन लेन-देन में शामिल हैं। ठगों ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हो चुका है और उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है।

लगातार धमकियों और डर के माहौल के बीच पीड़िता को यह विश्वास दिलाया गया कि यदि वे जांच में सहयोग करेंगी तो उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” से बचाया जा सकता है, अन्यथा जेल और कानूनी कार्रवाई तय है।

लगभग ढाई घंटे तक मानसिक प्रताड़ना, बैंक डिटेल्स हासिल की गईं
ठगों ने पीड़िता को करीब 2 घंटे 16 मिनट तक वीडियो कॉल पर बनाए रखा और लगातार पूछताछ के नाम पर उनके बैंक खातों, परिवारिक जानकारी और वित्तीय स्थिति की पूरी जानकारी हासिल की। इस दौरान उन्हें बार-बार धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी से संपर्क किया तो उनके परिवार के सदस्यों को भी केस में फंसा दिया जाएगा।

डर के चलते करोड़ों की रकम ट्रांसफर कराई गई
लगातार दबाव और मानसिक तनाव के कारण पीड़िता ने ठगों के निर्देश पर आरटीजीएस के माध्यम से पहले 20 लाख 20 हजार रुपए ट्रांसफर किए। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में किस्तों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए जमा करा दिए गए।

ठगों ने यहीं नहीं रुकते हुए 50 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग भी कर दी, जिससे मामला और गंभीर हो गया।

बेटे से मदद मांगते ही खुला पूरा मामला
जब पीड़िता ने और पैसे की व्यवस्था के लिए अपने बेटे Prashant Srivastava से 50 लाख रुपए की मांग की, तब उन्हें संदेह हुआ। बेटा तुरंत Bilaspur पहुंचा और पूरी जानकारी लेने के बाद स्पष्ट किया कि यह एक संगठित साइबर ठगी है। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस में शिकायत, साइबर थाना में केस दर्ज
घटना की शिकायत के बाद रेंज साइबर थाना पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारक के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज कर लिया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धारा 66C, 66D, 308, 318 सहित अन्य धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस अब बैंक खातों, ट्रांजेक्शन डिटेल्स और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर आरोपियों की पहचान में जुटी है।

साइबर ठगी का नया तरीका: “डिजिटल अरेस्ट” का बढ़ता खतरा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह मामला “डिजिटल अरेस्ट स्कैम” का उदाहरण है, जिसमें ठग खुद को पुलिस या जांच एजेंसी बताकर वीडियो कॉल के जरिए डर पैदा करते हैं और पीड़ित को मानसिक दबाव में लेकर पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।