July 23, 2026

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दहेज मृत्यु मामले में सास बरी, 16 साल बाद रद्द हुई 7 साल की सजा

बिलासपुर। दहेज प्रताड़ना और कथित दहेज मृत्यु के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी सास को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि मृतका को मौत से ठीक पहले दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था। इसके साथ ही वर्ष 2010 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल के सश्रम कारावास की सजा को भी निरस्त कर दिया गया।

क्या था मामला?

दुर्ग निवासी सोनल की शादी 18 जून 2006 को मनीष के साथ हुई थी। शादी के करीब छह महीने बाद 21 दिसंबर 2006 को संदिग्ध परिस्थितियों में उसकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया था कि सास शशिकला बाफना दहेज से असंतुष्ट थीं और अतिरिक्त राशि की मांग को लेकर बहू को प्रताड़ित करती थीं।

निचली अदालत ने सुनाई थी सजा

मामले में दुर्ग पुलिस ने दहेज मृत्यु का केस दर्ज किया था। सुनवाई के बाद मार्च 2010 में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने आरोपी सास को दोषी ठहराते हुए 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट ने क्यों किया बरी?

अपील की सुनवाई करते हुए जस्टिस रजनी दुबे की एकल पीठ ने पाया कि:

  • एफआईआर घटना के पांच दिन बाद दर्ज हुई थी।
  • मृतका के परिजनों ने स्वीकार किया कि आरोपी ने उनके सामने कभी सीधे दहेज की मांग नहीं की।
  • शुरुआती मेडिकल रिकॉर्ड में छत से कूदने के बजाय बाथरूम में गिरने का उल्लेख था।
  • गवाहों के बयान केवल सामान्य पारिवारिक विवाद दर्शाते हैं, दहेज के लिए प्रताड़ना नहीं।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज मृत्यु (धारा 304-बी) साबित करने के लिए यह आवश्यक है कि महिला को मौत से ठीक पहले दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित किया गया हो। उपलब्ध साक्ष्यों से यह तथ्य सिद्ध नहीं हुआ।

निचली अदालत के फैसले पर सवाल

कोर्ट ने माना कि सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया और गलत निष्कर्ष पर पहुंचकर दोषसिद्धि का आदेश पारित किया था। इसी आधार पर आरोपी सास की अपील स्वीकार करते हुए उन्हें सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया गया।