September 4, 2026

23 साल पुराने रिश्वत मामले में पूर्व पटवारी की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने उम्र के चलते घटाई सजा

बिलासपुर। जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में काम कराने के बदले 2 हजार रुपए रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व पटवारी माधव सिंह चंदेल को हाईकोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सजा की अवधि कम कर दी है। 73 वर्ष की उम्र और 23 साल पुराने मामले को देखते हुए हाईकोर्ट ने सजा में कमी की है।

जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत एक साल की सजा को घटाकर 6 महीने कर दिया। वहीं धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत सुनाई गई दो साल की सजा को घटाकर एक साल कर दिया गया।

2003 में 2 हजार रुपए रिश्वत लेने का मामला

मामला वर्ष 2003 में दुर्ग जिले का है। शिकायतकर्ता अर्जुन साहू ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में शिकायत की थी कि जमीन के दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़े काम के लिए तत्कालीन पटवारी माधव सिंह चंदेल 2 हजार रुपए रिश्वत मांग रहे हैं।

शिकायत के बाद ACB ने ट्रैप की कार्रवाई की। 31 दिसंबर 2003 को शिकायतकर्ता ने पटवारी को 2 हजार रुपए दिए। इसके बाद ACB टीम ने उसे पकड़ लिया। रिश्वत की रकम वाले नोटों पर फिनॉल्फ्थेलिन पाउडर लगाया गया था। जांच के दौरान रासायनिक परीक्षण में भी इसकी प्रतिक्रिया मिली।

2017 में निचली अदालत ने सुनाई थी 3 साल की सजा

मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2017 में पटवारी को दोषी ठहराते हुए कुल 3 साल की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।

बचाव पक्ष ने हाईकोर्ट में तर्क दिया कि रिश्वत की मांग साबित नहीं हुई है। यह भी कहा गया कि ट्रैप के दौरान रकम पटवारी की जेब से नहीं, बल्कि उसके बैग से बरामद हुई थी।

टेप रिकॉर्डिंग पेश नहीं होने की दलील

बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि रिश्वत की बातचीत रिकॉर्ड करने के लिए दिया गया टेप रिकॉर्डर और उसकी ट्रांसक्रिप्शन कोर्ट के सामने पेश नहीं की गई।

हाईकोर्ट ने माना कि टेप रिकॉर्डिंग प्राथमिक साक्ष्य के रूप में पेश नहीं हुई, लेकिन अन्य मौखिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से रिश्वत की मांग और रकम स्वीकार करने की बात साबित होती है।

दोषसिद्धि में दखल से कोर्ट का इनकार

हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे अपराध साबित किया है। कोर्ट ने यह भी माना कि राजस्व रिकॉर्ड में सुधार का काम पटवारी के दायित्व में था और इसी काम के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। इसलिए कोर्ट ने दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

हालांकि, मामले के 23 साल पुराने होने और आरोपी की उम्र 73 वर्ष होने समेत अन्य परिस्थितियों को देखते हुए सजा की अवधि कम कर दी गई।

30 अक्टूबर को करना होगा सरेंडर

हाईकोर्ट ने पूर्व पटवारी माधव सिंह चंदेल को 30 अक्टूबर 2026 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर कर शेष सजा भुगतने का निर्देश दिया है।