July 30, 2026

हाईकोर्ट की फटकार: पुलिस निजी वसूली एजेंट नहीं, 53 करोड़ रुपये होल्ड करने का आदेश रद्द

बिलासपुर |

पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस किसी कमर्शियल विवाद में “निजी वसूली एजेंट” की भूमिका नहीं निभा सकती। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक एनबीएफसी कंपनी के बैंक खाते में करोड़ों रुपये होल्ड करने के पुलिस आदेश को रद्द कर दिया।

मामला नई दिल्ली स्थित ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड का है, जो उद्योगों और छोटे व्यवसायियों को ऋण उपलब्ध कराती है। कंपनी का खाता रायपुर स्थित कोटक महिंद्रा बैंक शाखा में संचालित होता है, जिसमें प्रतिदिन 12 से 15 करोड़ रुपये तक की ईएमआई राशि जमा होती है।

6.9 लाख के विवाद में 53 करोड़ रुपये किए होल्ड

जानकारी के अनुसार कंपनी ने रायपुर की श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड को करीब 10 करोड़ रुपये का ऋण दिया था। बाद में श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट्स और उसकी सप्लायर कंपनी ओएफबी टेक के बीच वजन में कथित धोखाधड़ी को लेकर विवाद हुआ, जिसके आधार पर मंदिर हसौद थाना में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने ऑक्सीजो फाइनेंस के खाते में लेनदेन पर रोक लगाते हुए 53.47 करोड़ रुपये होल्ड कर दिए। बाद में यह राशि घटाकर 43.38 लाख रुपये कर दी गई।

कंपनी ने बताया मनमानी कार्रवाई

ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह एफआईआर में न तो आरोपी है और न ही कथित धोखाधड़ी से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध है। कंपनी का आरोप था कि पुलिस ने एक सिविल और व्यावसायिक विवाद में दबाव बनाने के उद्देश्य से पूरा बैंक खाता फ्रीज कर दिया, जिससे उसका कारोबार प्रभावित हुआ।

कोर्ट ने कहा- कार्रवाई अतार्किक और दंडात्मक

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर में शुरुआती नुकसान कुछ लाख रुपये का बताया गया था, जबकि उसके मुकाबले एक विनियमित वित्तीय संस्था के 53 करोड़ रुपये से अधिक होल्ड कर देना पूरी तरह असंगत, अतार्किक और दंडात्मक कार्रवाई है।

डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि पुलिस का काम अपराध की जांच करना है, न कि किसी पक्ष को लाभ पहुंचाने के लिए वसूली एजेंट की तरह काम करना। कोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को जारी पुलिस आदेश को निरस्त करते हुए राहत प्रदान की।