July 23, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सरकारी कर्मचारियों की निजी जानकारी RTI से नहीं होगी सार्वजनिक, जनहित हो तभी मिलेगी सूचना

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत शासकीय कर्मचारियों की निजी जानकारी साझा करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी लोक सेवक के व्यक्तिगत दस्तावेज, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति के समय दिया गया हलफनामा और सर्विस रिकॉर्ड उसकी निजी जानकारी (Personal Information) के दायरे में आते हैं। ऐसे दस्तावेज बिना ठोस जनहित के आरटीआई के माध्यम से उपलब्ध नहीं कराए जा सकते।

जनहित साबित होने पर ही मिलेगी जानकारी

हाईकोर्ट ने जन सूचना अधिकारियों (PIO) को निर्देश दिया है कि किसी सरकारी कर्मचारी की व्यक्तिगत जानकारी तभी उपलब्ध कराई जाए, जब संबंधित मामले में व्यापक और स्पष्ट जनहित साबित हो। केवल सूचना मांगने के आधार पर किसी कर्मचारी के निजी दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए जा सकते।

पटवारी की याचिका पर सुनाया फैसला

यह मामला रायगढ़ जिले के लैलूंगा तहसील में पदस्थ पटवारी रामनाथ सिंह से जुड़ा है। उनकी नियुक्ति 7 मार्च 2024 को पटवारी के पद पर हुई थी और वर्तमान में वे पटवारी हल्का नंबर-30, कामरगा में पदस्थ हैं।

RTI में मांगे गए थे निजी दस्तावेज

नियुक्ति के बाद एक निजी संगठन क्राइम फ्री इंडिया फोर्स ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व)-सह-जन सूचना अधिकारी, लैलूंगा के समक्ष आरटीआई आवेदन देकर रामनाथ सिंह के जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज, नियुक्ति के समय दिए गए हलफनामे तथा सर्विस रिकॉर्ड की प्रतियां मांगी थीं।

हाईकोर्ट पहुंचे पटवारी

अपनी निजी जानकारी सार्वजनिक होने की आशंका को देखते हुए पटवारी रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने दलील दी कि मांगे गए सभी दस्तावेज पूरी तरह व्यक्तिगत हैं और उनका किसी सार्वजनिक गतिविधि या व्यापक जनहित से कोई संबंध नहीं है। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया।

निजता के अधिकार को मिली मजबूती

हाईकोर्ट के इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों के निजता के अधिकार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरटीआई कानून का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसका उपयोग किसी व्यक्ति की निजी जानकारी सार्वजनिक करने के लिए नहीं किया जा सकता, जब तक कि उससे जुड़ा कोई बड़ा जनहित स्थापित न हो।