September 4, 2026

सौतेली मां को भरण-पोषण से नहीं कर सकते वंचित: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 3 बेटों को देने होंगे ₹9 हजार हर माह

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि निःसंतान और असहाय सौतेली मां को केवल सौतेली मां होने के आधार पर भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए 77 वर्षीय विधवा महिला को उसके तीन सौतेले बेटों से हर महीने कुल 9 हजार रुपए भरण-पोषण दिलाने का आदेश दिया है।

आदेश के मुताबिक, तीनों बेटों को 3-3 हजार रुपए प्रतिमाह देने होंगे। यह भुगतान सितंबर 2026 से शुरू किया जाएगा।

फैमिली कोर्ट ने याचिका कर दी थी खारिज

दरअसल, महिला ने फैमिली कोर्ट में अपने तीन सौतेले बेटों से हर महीने 20 हजार रुपए भरण-पोषण की मांग की थी। महिला का कहना था कि पति की मृत्यु के बाद बेटों ने उसकी देखभाल करना बंद कर दिया।

महिला ने यह भी दावा किया कि उसने अपने स्त्रीधन और पैतृक संपत्ति से कृषि भूमि खरीदी थी, लेकिन उससे होने वाली आय में उसे कोई हिस्सा नहीं दिया जा रहा था।

फैमिली कोर्ट ने यह कहते हुए महिला की याचिका खारिज कर दी थी कि संबंधित युवक उसके सौतेले बेटे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कीर्तिकांत डी. वडोदिया बनाम गुजरात राज्य मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया।

कोर्ट ने कहा कि यदि सौतेली मां निःसंतान, विधवा और स्वयं अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, तो परिस्थितियों के अनुसार वह अपने सौतेले बेटों से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए तीनों सौतेले बेटों को अपनी 77 वर्षीय विधवा सौतेली मां के भरण-पोषण के लिए हर महीने 3-3 हजार रुपए देने का निर्देश दिया है।