May 16, 2026

पत्नी को जिंदा जलाने वाले पति की उम्रकैद बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील खारिज की

हाईकोर्ट का सख्त फैसला

बिलासपुर। पत्नी की हत्या के दोषी पति की अपील को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

मरने से पहले के बयान को माना मजबूत साक्ष्य

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मृतका का मरने से पहले दिया गया बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) अपने आप में मजबूत और विश्वसनीय साक्ष्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पीड़िता का बयान दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त आधार होता है।

चरित्र शंका में पति ने दिया वारदात को अंजाम

यह मामला कबीरधाम जिले के पांडातराई का है, जहां आरोपी संतोष उर्फ गोलू श्रीवास्तव ने 18 नवंबर 2019 को अपनी पत्नी लता श्रीवास्तव पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी थी।
बताया गया कि आरोपी अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था, जिससे दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था।

जलती हालत में बचने की कोशिश, फिर भी नहीं बच सकी जान

घटना के दौरान गंभीर रूप से झुलसी महिला ने जान बचाने के लिए पास के तालाब में कूदने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने मजिस्ट्रेट के सामने अपने पति के खिलाफ बयान दर्ज कराया।

21 दिन बाद हुई मौत, ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा

करीब 21 दिनों तक इलाज के बाद 9 दिसंबर 2019 को महिला की मौत हो गई। पुलिस ने मृतका के बयान के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया।
ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया।