बिलासपुर। हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि एक बालिग और शादीशुदा महिला के साथ उसकी सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को रेप नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दोषमुक्त किए जाने के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
• दोषमुक्ति के खिलाफ अपील की मांग खारिज
पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील की अनुमति मांगते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
• सहमति से बने संबंध को नहीं माना अपराध
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि संबंध आपसी सहमति से बनाए गए हों, तो उसे रेप की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता, खासकर जब महिला बालिग और विवाहित हो।
• शादी के वादे पर बनाए संबंध का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर महिला से संबंध बनाए। घटना 2022 की बताई गई, जब दोनों एक ही स्थान पर काम करते थे।
• गवाहों और सबूतों में नहीं मिला दबाव का संकेत
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी ने डर, धमकी या जबरदस्ती से संबंध बनाए।
• पीड़िता पहले से शादीशुदा और गर्भवती थी
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि घटना के समय पीड़िता पहले से विवाहित और गर्भवती थी, जिससे उसके बयानों की प्रकृति पर भी विचार किया गया।
• नाबालिग होने या सहमति न देने का प्रमाण नहीं
मामले में यह भी साबित नहीं हुआ कि पीड़िता नाबालिग थी या वह सहमति देने में सक्षम नहीं थी।
• ट्रायल कोर्ट के फैसले को ठहराया सही
हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही माना और आरोपी की दोषमुक्ति को बरकरार रखा।
इस फैसले को कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें सहमति और परिस्थितियों को आधार बनाकर निर्णय दिया गया है।





