बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पर्यावरण प्रदूषण, जल स्रोतों के दूषित होने और सुरक्षा मानकों के कमजोर क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान बड़ा आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट ने प्रदेश की तीन शराब डिस्टिलरी का स्वतंत्र निरीक्षण कराने के लिए दो अधिवक्ताओं को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है। इनमें अधिवक्ता वैभव शुक्ला और अपूर्वा त्रिपाठी शामिल हैं, जिन्हें भाटिया वाइन मर्चेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड का निरीक्षण करना होगा।
सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कोर्ट को बताया कि भाटिया वाइन मर्चेंट्स और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज में निरीक्षण के दौरान परिसर के बाहर अनुपचारित अपशिष्ट जल का निर्वहन नहीं पाया गया और निगरानी प्रणाली मानकों के अनुरूप है।
हालांकि, वेलकम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। रिपोर्ट में निष्क्रिय अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली, दूषित निर्वहन, क्षतिग्रस्त लैगून, अत्यधिक उत्सर्जन और ऑनलाइन मॉनिटरिंग डेटा में गड़बड़ी जैसी कमियां दर्ज की गई हैं। इस पर नवंबर 2025 में 54.60 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा और बंद करने के निर्देश भी जारी किए गए थे।
कोर्ट ने सभी दस्तावेजों और शपथपत्रों की समीक्षा के बाद कहा कि स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है। इसके लिए कोर्ट कमिश्नरों को संबंधित इकाइयों का निरीक्षण कर 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।





