May 19, 2026

5 हजार स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं: हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, मांगी रिपोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। राज्य के 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं होने पर कोर्ट ने इसे शर्मनाक स्थिति बताया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद हालात में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा है। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी।

रिपोर्ट में सामने आई गंभीर स्थिति
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक समाचार रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें बताया गया कि 5,000 से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय नहीं हैं, जबकि 8,000 से ज्यादा स्कूलों में शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है।

छात्राओं पर पड़ रहा असर
कोर्ट ने कहा कि इस स्थिति के कारण छात्राओं और शिक्षकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर मूत्र संक्रमण जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। बिलासपुर जिले में ही 160 से अधिक स्कूलों में शौचालय से जुड़ी समस्याएं हैं और 200 से ज्यादा स्कूलों में शौचालय पूरी तरह अनुपयोगी हैं।

ड्रॉपआउट बढ़ने की आशंका
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि लड़कियों के लिए अलग और कार्यशील शौचालयों की कमी स्कूल छोड़ने की दर बढ़ाने का कारण बन सकती है। इसे कोर्ट ने एक गंभीर प्रणालीगत विफलता माना है।

आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले
यू-डीआईएसई 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 56,615 स्कूलों में से केवल 52,545 स्कूलों में ही लड़कियों के लिए कार्यशील शौचालय उपलब्ध हैं। जबकि सरकारी स्कूलों में करीब 19.54 लाख छात्राएं नामांकित हैं।

कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो सरकार को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।