May 14, 2026

बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: साक्ष्यों के अभाव में दुष्कर्म आरोपी बरी

बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। यह फैसला जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने सुनाया।

मामला राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव थाना क्षेत्र का है, जहां वर्ष 2003 में एक 20 वर्षीय युवती ने मूलचंद नामक व्यक्ति पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। पीड़िता के अनुसार, आरोपी उसे रात में घर से खींचकर खेत में ले गया और जबरदस्ती संबंध बनाए, साथ ही जान से मारने की धमकी दी।

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 7 वर्ष की सजा और धारा 506-बी के तहत 6 माह की अतिरिक्त सजा सुनाई थी। इसके बाद आरोपी ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 374 के तहत हाईकोर्ट में अपील दायर की।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सभी साक्ष्यों और गवाहियों का गहन परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की गवाही “स्टर्लिंग क्वालिटी” की नहीं है और उसमें कई विरोधाभास तथा असंगतियां मौजूद हैं। एक अहम तथ्य यह भी सामने आया कि घटना के 2-3 दिन बाद ही पीड़िता और आरोपी को साथ देखा गया था और ग्रामीणों की सलाह पर दोनों साथ रहने लगे थे।

यह भी उल्लेखनीय रहा कि स्वयं पीड़िता ने स्वीकार किया कि यदि आरोपी उसे स्वीकार कर लेता, तो वह एफआईआर दर्ज नहीं कराती। इसके अलावा मेडिकल जांच में शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं पाई गई और जबरन संबंध के स्पष्ट संकेत भी नहीं मिले। एफएसएल रिपोर्ट भी नकारात्मक रही।

घटना स्थल आबादी के बीच होने के बावजूद किसी ने कोई शोर-शराबा नहीं सुना। साथ ही घटना के करीब 8 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की गई, जिसे लेकर भी अदालत ने संदेह जताया, भले ही देरी का कारण पंचायत बताया गया हो।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल पीड़िता की गवाही के आधार पर दोषसिद्धि तभी संभव है, जब वह पूरी तरह विश्वसनीय, सुसंगत और संदेह से परे हो। चूंकि इस मामले में ऐसा नहीं पाया गया, इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।