May 14, 2026

बिलासपुर | हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दुष्कर्म व हत्या के दोषी की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में महिला से दुष्कर्म के बाद हत्या के दोषी को दी गई मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है। कोर्ट ने कहा कि फांसी की सजा केवल “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामलों में ही दी जा सकती है, और इस मामले में वह मानक पूरी तरह लागू नहीं होता।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी की उम्रकैद अब उसकी पूरी प्राकृतिक जीवन अवधि तक जारी रहेगी।

मामला क्या था
पीड़िता, 25 वर्षीय महिला, बेमेतरा परिवार न्यायालय में भृत्य के पद पर कार्यरत थी। 14 अगस्त 2022 को वह अपने गांव खैरमुड़ा से स्कूटी से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। अगले दिन उसके पिता ने डभरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

जांच के दौरान पुलिस को संदेह आरोपी शंकर निषाद पर गया, जो पीड़िता से संपर्क में था। कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस जांच में खुलासा
पूछताछ में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया। उसने बताया कि उसने पीड़िता को बहाने से बुलाया, फिर उसे सुनसान जंगल क्षेत्र में ले जाकर दुष्कर्म किया और बाद में ब्लेड से उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर जंगल से शव भी बरामद किया था।

इस मामले में निचली अदालत ने आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। सुनवाई के बाद अदालत ने फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सजा तय करते समय कानूनी मानकों और परिस्थितियों का संतुलन जरूरी है, और इस मामले में मृत्युदंड की आवश्यकता साबित नहीं होती।