May 15, 2026

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मानसिक रूप से दिव्यांग दुष्कर्म पीड़िता को गर्भपात की अनुमति, डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने के निर्देश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानसिक रूप से दिव्यांग युवती के यौन शोषण के बाद गर्भवती होने के मामले में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को अनचाही गर्भावस्था के लिए मजबूर करना उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर नुकसानदायक होगा।

इससे पहले सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने चीफ मेडिकल एंड हेल्थ ऑफिसर, कांकेर को निर्देश दिए थे कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम गठित कर पीड़िता की मेडिकल जांच कराई जाए। टीम में एक गायनेकोलॉजिस्ट का होना अनिवार्य किया गया था। कोर्ट ने प्रेग्नेंसी की स्थिति, उसकी अवधि और गर्भपात से संभावित जोखिम पर विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी थी।

मेडिकल रिपोर्ट पेश होने के बाद हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि ऐसी परिस्थितियों में पीड़िता को गर्भधारण जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। इसलिए गर्भपात की अनुमति देना न्यायसंगत है।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता अपने अभिभावक या रिश्तेदार के साथ सीएमएचओ कांकेर के समक्ष उपस्थित हो, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में मेडिकल प्रक्रिया पूरी की जाए।

इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि गर्भपात प्रक्रिया एमटीपी एक्ट 1971 के प्रावधानों के अनुसार कम से कम दो डॉक्टरों की देखरेख में, जिनमें एक गायनेकोलॉजिस्ट अनिवार्य रूप से शामिल हो, संपन्न की जाए।

सबसे महत्वपूर्ण निर्देश में कोर्ट ने कहा कि भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा जाए, ताकि आगे चल रहे आपराधिक मामले में इसे साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सके।