May 19, 2026

बिलासपुर हाईकोर्ट ने शिक्षक के खिलाफ फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र मामले में आपराधिक कार्रवाई रद्द की

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महासमुंद जिले के सहायक अध्यापक लखन बिहारी पटेल के खिलाफ फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पेश करने के आरोप में आपराधिक कार्रवाई प्रारंभ करने के आदेश को रद्द कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि अदालतें चिकित्सा विशेषज्ञ संस्थाएं नहीं हैं, और ऐसे मामलों में दिव्यांगता मूल्यांकन बोर्ड की राय को सम्मान देना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी समय पर सही तरीके से जारी किए गए प्रमाणपत्र को बाद के मेडिकल परीक्षण के आधार पर अमान्य नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि मूल प्रक्रिया में धोखाधड़ी हुई थी।

याचिकाकर्ता लखन बिहारी पटेल को 2010 में 45.4% कंडक्टिव हियरिंग लॉस के आधार पर दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया था। इसके बाद वह सही चयन प्रक्रिया से शिक्षक ग्रेड 3 के पद पर कार्यरत हैं।

2017 में उनके भाई कैलाश चंद्र पटेल द्वारा दी गई शिकायत के बाद महासमुंद कलेक्टर ने जांच के लिए एसडीओ राजस्व को निर्देशित किया। जांच के आधार पर याचिकाकर्ता के खिलाफ 2018 में आपराधिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।

हाईकोर्ट ने इस कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि बाद के मेडिकल परीक्षण पर आधारित निष्कर्ष गलत है और समय के साथ विकलांगता में बदलाव संभव है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई धोखाधड़ी या गलतबयानी साबित नहीं हुई है।