May 15, 2026

लिंगियाडीह बस्ती में तोड़फोड़ पर हाईकोर्ट की रोक, 36 परिवारों को अंतरिम राहत

लिंगियाडीह बस्ती स्थित राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत राशि जमा करने वाले 36 रहवासियों के मकानों और कब्जों को तोड़ने पर हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं को राहत देते हुए नगर निगम की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2019-20 में हुए सर्वे के दौरान उन्हें राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पात्र माना गया था और कब्जे वाली जमीन पर पट्टा देने का निर्णय लिया गया था। वर्ष 2022 में कई हितग्राहियों ने प्रीमियम राशि भी जमा कर दी थी, लेकिन इसके बाद पट्टा जारी नहीं किया गया।

वहीं वर्ष 2024 में नगर निगम बिलासपुर ने उसी जमीन पर व्यावसायिक परिसर और गार्डन विकसित करने की योजना बना ली, जिसके बाद प्रभावित परिवारों ने हाईकोर्ट की शरण ली।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और निगम की ओर से अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास ने अदालत को बताया कि 2023 में शासकीय जमीन पर पट्टा देने के नियम बदल गए हैं। नए नियमों के तहत इन लोगों को पट्टा नहीं दिया जा सकता और इसके बदले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खमतराई क्षेत्र में फ्लैट देने का प्रस्ताव है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव, अनिमेष वर्मा और आशीष बैक ने दलील दी कि योजना में चयन और राशि जमा होने के बाद नियमों में बदलाव से उनके अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि सरकार और नगर निगम अपने पूर्व वादे से पीछे नहीं हट सकते।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले को विस्तृत सुनवाई योग्य मानते हुए सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अंतिम सुनवाई अब ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद जून में होने की संभावना है।

गौरतलब है कि राजीव गांधी आश्रय योजना में कुल 503 लाभार्थी चयनित हुए थे, जिनमें से 113 परिवारों की जमीन खाली कराकर नगर निगम व्यावसायिक परियोजना विकसित करना चाहता है। फिलहाल अदालत के आदेश से 36 परिवारों को राहत मिल गई है।