बिलासपुर। न्यायधानी में मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में साहित्यकार, प्रबुद्धजन और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
बैठक को नंदकिशोर शुक्ल ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ी मातृभाषा के प्रति अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उनका कहना था कि नई शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा में शिक्षा को प्राथमिकता देने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा।
उन्होंने राज्य सरकार के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों के विस्तार के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह नीति मातृभाषा आधारित शिक्षा की भावना के विपरीत है और इसे पुनर्विचार की जरूरत है।
बैठक में मौजूद सदस्यों ने सहमति जताई कि मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक जागरूकता के साथ-साथ कानूनी प्रयास भी किए जाएंगे। साथ ही छत्तीसगढ़ी भाषा के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए रामकिशोर को जिला संयोजक बनाया गया।
कार्यक्रम में कई साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने मातृभाषा के संरक्षण और शिक्षा में उसके उपयोग को समय की जरूरत बताया।





