बिलासपुर। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बाइक रेंटल (ड्राइव-योरसेल्फ) सेवा शुरू की गई है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में यह इस तरह की पहली सेवा बताई जा रही है। बाइक की सुविधा स्टेशन परिसर में कोच रेस्टोरेंट के पास उपलब्ध होगी। इसका लाभ पर्यटकों, छात्रों, व्यावसायिक यात्रियों और आम नागरिकों को मिलेगा।
24 घंटे तक का किराया 400 रुपये
बाइक रेंटल सेवा में 0 से 4 घंटे के लिए 100 रुपये, 4 से 8 घंटे के लिए 200 रुपये, 8 से 16 घंटे के लिए 300 रुपये और 16 से 24 घंटे के लिए 400 रुपये किराया तय किया गया है।
बाइक लेने के लिए यात्रियों को ड्राइविंग लाइसेंस और आधार कार्ड की जानकारी देनी होगी। सेवा के तहत हेलमेट उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि पेट्रोल का खर्च यात्री को स्वयं वहन करना होगा। यात्रियों को स्कूटी से लेकर पल्सर तक अलग-अलग वाहन उपलब्ध होंगे।
19 अगस्त को लगेगी डाक अदालत
बिलासपुर में भारतीय डाक विभाग की ओर से जनसमस्याओं के निराकरण के लिए 19 अगस्त को सुबह 11 बजे डाक अदालत आयोजित की जाएगी। आयोजन कार्यालय अधीक्षक डाकघर, बिलासपुर संभाग में होगा।
डाक अदालत में काउंटर सेवा, मनीऑर्डर, बचत बैंक, मूल्य देय वस्तुएं, डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा, स्पीड पोस्ट और विदेशी डाक से संबंधित शिकायतों की सुनवाई की जाएगी।
चार साल से लापता नाबालिग रायगढ़ में मिली
रायगढ़। घरघोड़ा के वर्ष 2021 के दुष्कर्म और POCSO मामले में करीब चार साल से लापता नाबालिग पीड़िता को पुलिस ने 10 अगस्त को रायगढ़ से बरामद कर लिया। इसके बाद 11 अगस्त को विशेष POCSO न्यायालय, घरघोड़ा में उसकी पेशी कराई गई।
पुलिस के अनुसार, पीड़िता के लापता होने के कारण मामले की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय से प्रभावित हो रही थी। पुलिस ने मामले में धारा 363, 366, 376 और POCSO एक्ट की धारा 4 व 6 के तहत अपराध दर्ज किया था।
पीड़िता की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने परिजनों, सहेलियों और रिश्तेदारों से पूछताछ कर उसकी तलाश की। पीड़िता के मिलने और कोर्ट में पेशी के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है।
दृष्टिबाधितों के अलग आरक्षण का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी नौकरियों में दृष्टिबाधित और लो-विजन अभ्यर्थियों के लिए अलग आरक्षण नहीं दिए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने राज्य शासन और छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
भिलाई निवासी विवेक सिंह, जिन्हें स्टारगार्डट बीमारी के कारण 90 प्रतिशत कम दृष्टि दिव्यांगता है, ने अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव के माध्यम से याचिका दायर की है। याचिका में CGPSC की विभिन्न भर्ती विज्ञप्तियों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि दिव्यांग आरक्षित पदों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने के बजाय एक ही श्रेणी में रखा जा रहा है।
1 प्रतिशत अलग आरक्षण का दावा
याचिकाकर्ता का तर्क है कि दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 33 और 34 के तहत कुल 4 प्रतिशत दिव्यांग आरक्षण में दृष्टिबाधित और लो-विजन अभ्यर्थियों के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि UPSC के अलावा मध्यप्रदेश और ओडिशा में दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए अलग आरक्षण लागू है।
सरकार ने याचिका की वैधता पर उठाए सवाल
राज्य सरकार ने याचिका की वैधता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता फिलहाल किसी परीक्षा में शामिल नहीं हो रहा है और उसकी मांग जनहित याचिका के स्वरूप की है।
वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि पूर्व की भर्तियों में उचित आरक्षण नहीं मिलने के कारण वह स्वयं प्रभावित हुआ है। इसी आधार पर याचिका को सुनवाई योग्य बताया गया है। हाईकोर्ट ने मामले में राज्य शासन और CGPSC से जवाब मांगा है।





