बिलासपुर। बिलासपुर शहर में बिजली व्यवस्था और जलभराव की समस्या को लेकर हाईकोर्ट की निगरानी लगातार जारी है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका की सुनवाई की। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) और नगर निगम बिलासपुर से कार्यों की मापनीय और समयबद्ध प्रगति का नया व्यक्तिगत शपथपत्र मांगा है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी और नगर निगम की ओर से पहले पेश किए गए शपथपत्रों की जानकारी कोर्ट के सामने रखी गई।
बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए चल रहे कई काम
कोर्ट ने CSPDCL के प्रबंध निदेशक की ओर से पेश शपथपत्र में दर्ज प्रगति का अवलोकन किया। इसमें बताया गया कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त सीमेंट के बिजली पोल को लोहे के पोल से बदलने का काम जारी है।
आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति में बाधा पैदा करने वाले खतरनाक विज्ञापन होर्डिंग की पहचान कर उनकी जानकारी नगर निगम को भेजी गई है।
इसके अलावा लोखंडी में अतिरिक्त एक्स्ट्रा हाई वोल्टेज सब स्टेशन स्थापित करने के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। रिवर व्यू क्षेत्र में दो नए 33/11 केवी सब स्टेशन स्थापित करने के लिए कलेक्टर को भूमि संबंधी प्रस्ताव भेजे गए हैं।
बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वीकृत राशि से विभिन्न कार्य भी किए जा रहे हैं।
जलभराव से निपटने निगम की तैयारी
नगर निगम के शपथपत्र के अनुसार, विकास भवन स्थित नेहरू चौक बाढ़ नियंत्रण कक्ष मानसून के दौरान लगातार काम कर रहा है। यहां आने वाली शिकायतों का रिकॉर्ड रखने के लिए शिकायत रजिस्टर के साथ एक्सेल डेटाबेस भी तैयार किया जा रहा है।
जलभराव प्रभावित इलाकों में ब्लिचिंग पाउडर का छिड़काव, फॉगिंग और सफाई जैसे कार्य किए जा रहे हैं। इसके अलावा स्काईलिफ्ट वाहन की खरीद के लिए टेंडर खोला जा चुका है और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है।
अगली सुनवाई से पहले देना होगा कार्यों का पूरा ब्यौरा
हाईकोर्ट ने दोनों विभागों के अधिकारियों को अगली सुनवाई से पहले नया व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CSPDCL के प्रबंध निदेशक को बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए किए जा रहे कार्यों की स्पष्ट और वर्तमान स्थिति बतानी होगी। वहीं नगर निगम आयुक्त को बाढ़ नियंत्रण कक्ष में प्राप्त शिकायतों की संख्या और उनके निस्तारण की स्थिति की जानकारी देनी होगी।
कोर्ट ने लंबित कार्यों में देरी के कारण और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी शपथपत्र में बताने के निर्देश दिए हैं।





