July 29, 2026

डोंगरगढ़ का लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप मामला: फॉरेक्स निवेश के नाम पर बड़े नेटवर्क की जांच, करोड़ों के लेनदेन पर उठे सवाल

डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ में सामने आया कथित लॉन्ग एशिया ट्रेडिंग ऐप मामला अब बड़े वित्तीय नेटवर्क की जांच का विषय बन गया है। निवेशकों की शिकायतों, दस्तावेजों, वीडियो, फोटो और ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर संचालित यह नेटवर्क किस तरह काम कर रहा था।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, अगस्त 2024 में डोंगरगढ़ निवासी कुलजीत सिंह भाटिया, जोगेंद्र वर्मा और रायपुर निवासी अभय कुंडले ने देश के कई शहरों में बड़े होटलों में सेमिनार आयोजित कर लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया। इनमें कोलकाता, बलिया, पुणे, मुंबई, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के कई शहर शामिल बताए गए हैं।

निवेशकों का आरोप है कि उन्हें XTB International Limited के माध्यम से ऑटोमेटिक फॉरेक्स ट्रेडिंग का दावा किया गया। उन्हें बताया गया कि महज 500 अमेरिकी डॉलर से निवेश शुरू कर हर महीने 8 से 10 प्रतिशत तक रिटर्न कमाया जा सकता है। साथ ही मूलधन सुरक्षित रहने और जरूरत पड़ने पर रकम निकालने का भरोसा दिलाया गया।

शुरुआत में भुगतान से बढ़ा भरोसा

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, शुरुआती दौर में निवेशकों को नियमित भुगतान मिलता रहा, जिससे उनका विश्वास बढ़ा। इसके बाद कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भी इस नेटवर्क से जोड़ दिया। रायपुर में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में भी हजारों लोगों के इस प्लेटफॉर्म से लाभ कमाने का दावा किए जाने की बात सामने आई है।

कंपनी बदलने और निकासी बंद होने का आरोप

मामले में सबसे बड़ा सवाल निवेशकों के खातों के कथित ट्रांसफर को लेकर उठ रहा है। शिकायत के अनुसार, बाद में निवेशकों के खाते XTB International Limited से FCXX International Limited और फिर Long Asia Group NZ Limited में स्थानांतरित कर दिए गए। निवेशकों का आरोप है कि इस बदलाव के लिए उनसे कोई स्पष्ट सहमति नहीं ली गई।

निवेशकों का कहना है कि जनवरी 2026 तक निकासी प्रक्रिया सामान्य चल रही थी, लेकिन इसके बाद अचानक पैसे निकालने पर रोक लग गई। इसके बाद कंपनी की ओर से कभी तकनीकी समस्या, कभी लिक्विडिटी और कभी माइग्रेशन प्रक्रिया का हवाला देकर समय मांगा जाता रहा। वर्तमान में कई निवेशकों के खाते में रकम दिखाई दे रही है, लेकिन वे न तो ट्रेडिंग कर पा रहे हैं और न ही अपनी राशि निकाल पा रहे हैं।

कैश लेनदेन नेटवर्क की भी जांच

जांच में कथित कैश नेटवर्क भी सामने आया है। कई निवेशकों का दावा है कि बड़ी संख्या में निवेश बैंकिंग माध्यम के बजाय नकद लिया गया। स्थानीय ब्रोकर भारतीय मुद्रा लेकर उसे ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर डॉलर के रूप में निवेश दिखाते थे। यदि यह दावा जांच में सही पाया जाता है तो बड़े पैमाने पर हुए नकद लेनदेन की जांच अहम होगी।

KYC प्रक्रिया से बढ़ा लोगों का भरोसा

निवेशकों के अनुसार, अकाउंट खोलने के दौरान पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाती थी। सख्त केवाईसी प्रक्रिया के कारण लोगों को प्लेटफॉर्म के वैध होने का भरोसा हुआ। कई लोगों ने अपनी बचत, बैंक से निकाली रकम और उधार लेकर भी निवेश कर दिया।

70-30 कमीशन मॉडल का दावा

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नेटवर्क को बढ़ाने के लिए 70-30 कमीशन मॉडल अपनाया गया था। इसके तहत ट्रेडिंग लाभ का 70 प्रतिशत निवेशक और 30 प्रतिशत ब्रोकर को मिलने का दावा किया जाता था। इसी मॉडल के चलते बड़ी संख्या में लोग एजेंट के रूप में जुड़ते चले गए। डोंगरगढ़ में भी कई स्थानीय ब्रोकरों के सक्रिय होने की बात सामने आ रही है।

आर्थिक स्थिति में बदलाव पर भी उठे सवाल

मामले में आरोपियों की आर्थिक स्थिति में कथित बदलाव भी जांच का हिस्सा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की संपत्ति और रहन-सहन में कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव आया। हालांकि इन संपत्तियों का वास्तविक स्रोत क्या है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा।

डोंगरगढ़ गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष परमजीत सिंह भाटिया ने बताया कि कुलजीत सिंह भाटिया पहले गुरुद्वारा की सलाहकार समिति से जुड़े थे, लेकिन गतिविधियों और बढ़ती संपत्तियों को लेकर संदेह के बाद उन्हें समिति से हटा दिया गया था।

निवेशकों ने EOW जांच की मांग की

पीड़ित निवेशकों का कहना है कि वे फरवरी 2026 में भी डोंगरगढ़ पहुंचकर कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। अब दोबारा बड़ी संख्या में निवेशक डोंगरगढ़ पहुंचे हैं। उन्होंने मामले की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) से कराने, आरोपियों के बैंक खाते, डिजिटल वॉलेट, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रकम वापस दिलाने की मांग की है।

फिलहाल जांच के केंद्र में कई सवाल हैं—क्या यह वास्तव में वैध फॉरेक्स ट्रेडिंग थी या निवेश धोखाधड़ी का मामला? कंपनियां बार-बार क्यों बदली गईं? शुरुआती दौर में मिलने वाला रिटर्न किस स्रोत से दिया जा रहा था? और नेटवर्क से जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति में अचानक बदलाव का कारण क्या था? इन सभी सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।