July 23, 2026

Bilaspur Snake Bite Scam: फर्जी मुआवजा घोटाले में 2 आरक्षक गिरफ्तार, अब तक 19 आरोपी सलाखों के पीछे

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित फर्जी सर्पदंश (स्नेक बाइट) मुआवजा घोटाले में पुलिस जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। अब इस मामले में सिम्स पुलिस चौकी के दो आरक्षकों को गिरफ्तार किया गया है। इनके साथ अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी, वकील, तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारियों सहित कुल 19 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में हीरा खांडे गिरोह का नाम सामने आया है, जिसने सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए मौत के कारणों में फर्जीवाड़ा किया।

अस्पताल से तहसील तक फैला था नेटवर्क

पुलिस जांच के अनुसार, सिम्स अस्पताल में किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद अस्पताल या पुलिस चौकी से गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर को सूचना दी जाती थी। इसके बाद गिरोह सक्रिय होकर मृतकों के परिजनों को सरकारी मुआवजे का लालच देता था और सामान्य बीमारी, कैंसर, आत्महत्या या अन्य कारणों से हुई मौत को सर्पदंश से हुई मौत के रूप में दर्ज कराने की साजिश रचता था।

फर्जी दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजस्व प्रक्रिया के जरिए आपदा राहत के तहत मिलने वाली सरकारी राशि स्वीकृत कराई जाती थी, जिसमें मुआवजे का कुछ हिस्सा मृतक के परिजनों को देकर बाकी रकम गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे।

दो आरक्षक भी गिरफ्तार

जांच में खुलासा हुआ कि सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ आरक्षक रामकुमार पाटनवार और रामेश्वर भास्कर गिरोह को शवों की सूचना पहुंचाते थे। दोनों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।

अब तक 19 आरोपी गिरफ्तार

इस मामले में अब तक डॉक्टर, वकील, पुलिसकर्मी, राजस्व विभाग के कर्मचारी और गिरोह के सदस्य समेत 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें गिरोह के सरगना हीरा प्रसाद खांडेकर, महेंद्र मनहर, डॉक्टर, अधिवक्ता, तहसील कार्यालय के कर्मचारी और दोनों आरक्षक शामिल हैं।

फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासा

मामले का पहला खुलासा वर्ष 2025 में हुआ था, जब बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस मामले में डॉक्टर, वकील और मृतक के परिजनों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया।

लिपिक संघ ने जताया विरोध

एसडीएम और तहसील कार्यालय के लिपिकों की गिरफ्तारी के विरोध में छत्तीसगढ़ प्रदेश लिपिक वर्गीय शासकीय कर्मचारी संघ ने प्रदर्शन किया। संघ का कहना है कि मुआवजा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया कई स्तरों से होकर गुजरती है और केवल लिपिकों पर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

विधानसभा में भी गूंजा था मामला

सर्पदंश मुआवजा घोटाले का मुद्दा हाल ही में विधानसभा के मानसून सत्र में भी उठा था। चर्चा के दौरान बताया गया कि जशपुर जिले में तीन वर्षों में 96 सर्पदंश मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दर्शाकर करीब 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा वितरित किया गया। इसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया था।