July 23, 2026

17 करोड़ के स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई, डॉ. प्रियंका सोनी समेत 4 गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सिम्स में पदस्थ रहीं डॉ. प्रियंका सोनी समेत एसडीएम कार्यालय और तहसीलदार कार्यालय के तीन क्लर्कों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सर्पदंश से मौत की फर्जी रिपोर्ट तैयार कर 17 करोड़ 24 लाख रुपये से अधिक के मुआवजे का घोटाला किया गया। फिलहाल मामले से जुड़े 16 प्रकरणों की जांच जारी है और पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।

यह मामला विधानसभा में भी गूंजा था। जशपुर जिले में पिछले तीन वर्षों में सर्पदंश से 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें दिखाकर करोड़ों रुपये का मुआवजा जारी कर दिया गया। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।

जांच में सामने आया कि साल 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र में जहर खाने से हुई एक मौत को स्नेक बाइट बताकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। इस मामले में पहले ही डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक वकील को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

ताजा कार्रवाई में एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक, गरीब राम बिंझवार और तहसीलदार कार्यालय के क्लर्क हरिशंकर राठौर को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, इनकी भूमिका फर्जी दस्तावेज तैयार कर मुआवजा स्वीकृत कराने में रही है।

शासन के नियमों के अनुसार सर्पदंश से मृत्यु होने पर 4 लाख रुपये के मुआवजे का प्रावधान है। आरोप है कि इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए सामान्य मौतों को सर्पदंश बताकर सरकारी खजाने से लाखों रुपये की राशि निकाली गई। महमंद निवासी निसार खान और लता सूर्यवंशी की मौत के मामलों में भी फर्जी स्नेक बाइट रिपोर्ट तैयार करने की पुष्टि हुई है। इस मामले में दो मृतकों के परिजन और एक वकील पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

पुलिस की जांच में सिम्स के 4 से 5 अन्य डॉक्टर भी संदेह के दायरे में हैं। उनसे पूछताछ की जा चुकी है और आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित घोटाले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।