July 23, 2026

नशे में धुत्त दूल्हे को दुल्हन ने लौटाया, मुस्कान बनी जिले की आइकॉन शादी से किया इंकार, पुलिस अधीक्षक ने साहस को सराहा; पढ़ाई का खर्च उठाने और काउंसलर नियुक्त करने का फैसला

जांजगीर-चांपा। जिले के कोसमंदा गांव की बेटी मुस्कान प्रधान ने समाज के सामने एक मिसाल पेश करते हुए शराब के नशे में धुत्त दूल्हे से शादी करने से इंकार कर दिया। शादी के दिन दूल्हे की हालत देखकर मुस्कान ने साफ शब्दों में कहा, “जो खुद को नहीं संभाल पा रहा है, वह मुझे क्या संभालेगा।” इसके बाद बारात को बिना दुल्हन के ही वापस लौटना पड़ा।

घटना 23 जून की रात की है। मुस्कान के घर बारात पहुंची तो दूल्हा शराब के नशे में था। इसकी जानकारी मिलते ही दुल्हन बनी मुस्कान ने शादी से इनकार कर दिया। दूल्हे पक्ष ने काफी समझाने और दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन मुस्कान अपने फैसले पर अडिग रही।

दुल्हन के इंकार के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया। दूल्हे पक्ष के लोग शादी कराने की जिद पर अड़े रहे, लेकिन मुस्कान के परिवार ने उसका पूरा साथ दिया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को बुलाना पड़ा। आखिरकार विरोध और दबाव के बीच बारात को वापस खोखरा गांव लौटना पड़ा।

मुस्कान के इस फैसले के पीछे उसकी जिंदगी का दर्द भी जुड़ा है। तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी मुस्कान ने अपने परिवार में शराब के दुष्परिणाम करीब से देखे हैं। उसके पिता शराब के आदी थे और शादी के 15 साल बाद उनका निधन हो गया था। परिवार की परेशानियों को देखते हुए मुस्कान ने अपनी मां जैसी जिंदगी न जीने का संकल्प लिया और शराबी दूल्हे को ठुकराने का साहसिक कदम उठाया।

मुस्कान के इस निर्णय की सराहना सिर्फ गांव और परिवार तक सीमित नहीं रही। जिला प्रशासन, महिला संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी उसके साहस को सम्मान दिया। पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने मुस्कान को नशे के खिलाफ जिले का आइकॉन घोषित किया है। साथ ही उसे काउंसलर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पुलिस विभाग ने मुस्कान की उच्च शिक्षा में सहयोग करने का भी फैसला लिया है। अधिकारियों ने उसके कॉलेज तक की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने की घोषणा की है। मुस्कान का यह कदम अब जिले में महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति अभियान की प्रेरणादायक मिसाल बन गया है।