रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को प्रश्नकाल के दौरान उर्वरक (खाद) के वितरण को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विधायक दलेश्वर साहू ने सहकारी और निजी क्षेत्रों में खाद वितरण के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए सरकार से विरोधाभास का कारण पूछा। इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए विधायक से ही पूछा कि वे यह आंकड़े कहां से लेकर आए हैं।
आंकड़ों को लेकर हुआ विवाद
विधायक दलेश्वर साहू ने कहा कि सरकार के जवाब में सहकारी क्षेत्र को 70 प्रतिशत और निजी क्षेत्र को 30 प्रतिशत आबंटन का उल्लेख है, जबकि अन्य आंकड़ों में सहकारिता को 48 प्रतिशत और निजी क्षेत्र को 52 प्रतिशत वितरण बताया गया है। उन्होंने पूछा कि दोनों आंकड़ों में अंतर क्यों है।
इस पर मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि सरकार ने तीन पन्नों में विस्तृत उत्तर उपलब्ध कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद का कुल भंडारण सहकारी क्षेत्र में 64 प्रतिशत और निजी क्षेत्र में 36 प्रतिशत है। मंत्री ने कहा, “आप ये आंकड़े कहां से ला रहे हैं? आप सदन को गुमराह करने की स्थिति बना रहे हैं, जबकि मैं सही जानकारी दे रहा हूं।”
लक्ष्य से अधिक वितरण पर उठाए सवाल
दलेश्वर साहू ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां 10 यूनिट की मांग होती है, वहां 25 यूनिट तक खाद उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों की जांच समिति गठित कर कराई जाए और पूछा कि कंपनियों पर आखिर किसका नियंत्रण है।
मंत्री बोले- आदिवासी क्षेत्रों को दी गई प्राथमिकता
जवाब में मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता आदिवासी क्षेत्र हैं, जहां समय पर खाद पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। इसलिए वहां पहले से पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों का आबंटन भारत सरकार द्वारा किया जाता है, जबकि राज्य सरकार केवल यह तय करती है कि किस क्षेत्र में पहले आपूर्ति की जाए।
जांच की मांग ठुकराई
विधायक दलेश्वर साहू ने फिर पूछा कि जहां 50 प्रतिशत से अधिक खाद का वितरण किया गया है, क्या वहां जांच कराई जाएगी? इस पर मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “इस मामले में जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।” मंत्री के इस जवाब के बाद सदन में कुछ देर तक बहस का माहौल बना रहा।





