दुर्ग: 407 करोड़ की अंतर राशि आज किसानों के खातों में
दुर्ग। जिले के समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने वाले 1,06,830 किसानों को आज 407 करोड़ 89 लाख 82 हजार रुपये की अंतर राशि का भुगतान किया जाएगा। कृषक उन्नति योजना के तहत कॉमन धान पर 15,351 रुपये प्रति एकड़ और ग्रेड-ए धान पर 14,931 रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता दी जाएगी।
विकासखंडवार देखें तो दुर्ग के 25,057 किसानों को 8703.03 लाख, पाटन के 44,122 किसानों को 16,995.87 लाख और धमधा के 37,651 किसानों को 15,090.54 लाख रुपये जारी किए जा रहे हैं।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर अधिवक्ता से ठगी
दुर्ग। मोहन नगर थाना क्षेत्र में एक अधिवक्ता से 3 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोपी ने 15-20% मासिक लाभ का झांसा देकर निवेश कराया और बाद में रकम लौटाने से इनकार कर दिया। पुलिस ने धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भिलाई: एचएसएलटी ठेका श्रमिकों को पेंशन शुरू
भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र में कार्यरत रहे एचएसएलटी ठेका श्रमिकों की लंबित पेंशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। 250 में से 110 श्रमिकों को 2,700 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलना प्रारंभ हो गया है। शेष प्रकरण प्रक्रिया में हैं।
राजनांदगांव में होली बाजार सजा, करोड़ों के कारोबार की उम्मीद
राजनांदगांव। शहर के चौक-चौराहों पर होली की रौनक बढ़ गई है। हर्बल रंग, गुलाल और आकर्षक पिचकारियों की बिक्री जोरों पर है। व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष भी करोड़ों रुपये के कारोबार की संभावना है।
पंडितों के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन होगा। शहर में दो दिवसीय फाग महोत्सव 28 फरवरी से आयोजित किया जा रहा है।
अतिक्रमण पर निगम की कार्रवाई
राजनांदगांव। निगम की टीम ने पुराना बस स्टैंड, भगत सिंह चौक और ठाकुर प्यारेलाल चौक में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की। यातायात बाधित करने वाले ठेले हटाए गए और नालियों पर किए गए अवैध निर्माण तोड़े गए।
बूढ़ा सागर का सीवरेज प्लांट अधूरा
राजनांदगांव। ऐतिहासिक बूढ़ा सागर में गंदे पानी की रोकथाम के लिए 3 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बन रहा सीवरेज प्लांट अब तक पूर्ण नहीं हो पाया है। पूर्व में 16 करोड़ से अधिक राशि से सौंदर्यीकरण कार्य हुए, लेकिन जल संरक्षण की व्यवस्था अधूरी है।
ऐतिहासिक कुएं सिमटकर 33 रह गए
राजनांदगांव। नगर निगम रिकॉर्ड में दर्ज 61 ऐतिहासिक कुओं में से अब केवल 33 शेष हैं। अतिक्रमण और सफाई के अभाव में अधिकांश कुएं अनुपयोगी हो गए हैं। गिरते जलस्तर के बीच इनके संरक्षण की मांग तेज हो गई है।





