July 23, 2026

CG High Court: छोटी-मोटी नोकझोंक मानसिक क्रूरता नहीं, तलाक की पति की अपील खारिज

बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी नोकझोंक या सामान्य असहमति को मानसिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि केवल व्यवहार से असंतोष या विचारों का मेल नहीं होना तलाक का आधार नहीं बन सकता। इसी आधार पर पति की तलाक की अपील को खारिज कर दिया गया।

परिवार न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से स्पष्ट है कि पत्नी हमेशा अपने पति के साथ दोबारा रहने को तैयार थी, जबकि पति ने वैवाहिक संबंध बहाल करने में कोई विशेष रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में पति तलाक का हकदार नहीं है।

प्रेम विवाह के बाद हुआ था विवाद

रायपुर निवासी दंपति ने वर्ष 2014 में परिवार की सहमति से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार प्रेम विवाह किया था। दोनों के दो बच्चे भी हैं। कुछ समय बाद पारिवारिक विवाद होने पर पत्नी बच्चों के साथ मायके चली गई। इसके बाद पति ने पत्नी पर मानसिक क्रूरता का आरोप लगाते हुए परिवार न्यायालय में तलाक की याचिका दायर की थी।

इन आरोपों को कोर्ट ने नहीं माना क्रूरता

पति ने आरोप लगाया था कि पत्नी उसकी बहनों (ननदों) के साथ नहीं रहना चाहती थी, उन्हें बच्चे को छूने नहीं देती थी, रिश्तेदारों से अच्छा व्यवहार नहीं करती थी और आत्महत्या की धमकी देती थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी का अपने बच्चे के प्रति अधिक संरक्षण का भाव क्रूरता नहीं माना जा सकता और इसे पति या उसके परिवार के प्रति दुर्व्यवहार का आधार नहीं बनाया जा सकता।

पत्नी के हलफनामे को माना अहम

कोर्ट ने पत्नी के वर्ष 2018 के हलफनामे का भी उल्लेख किया, जिसमें उसने स्वीकार किया था कि पारिवारिक विवाद के दौरान गुस्से में उसने अपने हाथ की नस काट ली थी। साथ ही उसने अपने कृत्य पर पछतावा जताते हुए भविष्य में ऐसी गलती नहीं दोहराने और पति के साथ खुशहाल जीवन बिताने की इच्छा व्यक्त की थी। कोर्ट ने इसे इस बात का प्रमाण माना कि पत्नी की ओर से मानसिक क्रूरता या वैवाहिक संबंध तोड़ने की मंशा नहीं थी।

हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति-पत्नी के बीच कभी-कभार होने वाले मतभेद, नोकझोंक या स्वभाव में अंतर को मानसिक क्रूरता नहीं कहा जा सकता। जब तक गंभीर और ठोस आधार न हों, केवल वैवाहिक असहमति के आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश नहीं दिया जा सकता। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने पति की अपील खारिज कर दी।