September 4, 2026

CG High Court: राज्यपाल के आपत्तिजनक कार्टून मामले में याचिकाकर्ताओं को राहत, बिना शर्त माफी और पोस्ट हटाने की शर्त

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल से संबंधित कथित आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर साझा करने और असमिया भाषा में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को राहत दी है। हालांकि, यह राहत बिना शर्त माफी, आपत्तिजनक सामग्री हटाने और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति नहीं करने समेत कई शर्तों के पालन पर दी गई है।

राज्यपाल से संबंधित कार्टून फेसबुक पर किया था साझा

मामले में याचिकाकर्ता प्रणव कलिता और लक्ष्यधर राजबोंगसी ने राज्यपाल से संबंधित कार्टून को अपने-अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया था। आरोप है कि पोस्ट के कैप्शन में असमिया भाषा में राज्यपाल के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी भी की गई थी।

लोकभवन की शिकायत के आधार पर इसे संवैधानिक पद की गरिमा और राज्यपाल की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कृत्य बताया गया था।

सिविल लाइन थाने में दर्ज हुई थी FIR

मामले में लोकभवन की ओर से रायपुर के सिविल लाइन थाने में FIR क्रमांक 232/2026 दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने मामले में आरोप पत्र भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रायपुर की अदालत में पेश कर दिया था।

FIR निरस्त कराने के लिए दोनों याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का रुख किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने और सोशल मीडिया से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की इच्छा जताई।

दोबारा माफी मांगने के बाद बनी सहमति

याचिकाकर्ताओं ने 19 अगस्त 2026 को दोबारा बिना शर्त माफी का शपथ पत्र हाईकोर्ट में पेश किया। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से कुछ कड़ी शर्तों के साथ समझौते पर सहमति दी गई।

इन शर्तों में संबंधित फेसबुक अकाउंट पर मूल पोस्ट के समान प्रमुखता से माफी प्रकाशित करना और गुवाहाटी से प्रकाशित होने वाले निर्दिष्ट दैनिक समाचार पत्रों में भी माफी प्रकाशित करना शामिल था।

आपत्तिजनक सामग्री स्थायी रूप से हटाने का निर्देश

हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अपने नियंत्रण वाले सभी डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री स्थायी रूप से हटाने का निर्देश दिया है। साथ ही भविष्य में इस तरह का आचरण नहीं दोहराने का वचन देने को कहा गया है।

इसके अलावा असम में दर्ज प्रतिशोधात्मक FIR को वापस लेने या बंद कराने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने की शर्त भी रखी गई है।

शर्तों के पालन पर मिली हाईकोर्ट से राहत

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए समझौते के आधार पर मामले का निराकरण किया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की बिना शर्त माफी, आपत्तिजनक पोस्ट के प्रभाव को कम करने और संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा को ध्यान में रखा।

हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से दी गई राहत सभी निर्धारित शर्तों के कड़ाई से पालन पर निर्भर रहेगी।