July 23, 2026

CG High Court: सड़क हादसों पर हाई कोर्ट सख्त, सरकार-एनएचएआई से मांगा शपथ पत्र में जवाब

बिलासपुर।

छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और मौतों पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और संबंधित विभागों से शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सड़क सुरक्षा उपायों में लापरवाही पर भी नाराजगी जताई।

सड़क सुरक्षा पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर स्वत: संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता रवींद्र शर्मा और अपूर्व त्रिपाठी ने विभिन्न जिलों से जुटाए गए अधिकृत आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि सड़क सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग नियमों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं और कई जिलों में सड़क सुरक्षा समिति की मासिक बैठकें भी नियमित रूप से नहीं हो रही हैं।

2025 में 6,967 लोगों की मौत

अदालत में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में प्रदेश में 15,484 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 6,967 लोगों की मौत हुई और 13,156 लोग घायल हुए। वहीं वर्ष 2026 में 31 मई तक केवल पांच महीनों में 6,891 सड़क हादसों में 3,170 लोगों की जान जा चुकी है।

सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकें भी नहीं

कोर्ट के समक्ष बताया गया कि कई जिलों में सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें नियमों के अनुसार आयोजित नहीं की जा रही हैं। सरगुजा जिले में एक वर्ष के दौरान 300 से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत होने के बावजूद पूरे साल में केवल एक बैठक हुई। कांकेर जिले में भी सड़क सुरक्षा समिति की महज एक बैठक आयोजित की गई।

हाईवे पर मवेशियों और अवैध पार्किंग पर नाराजगी

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य सड़कों पर बैठे मवेशियों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रात के समय यह स्थिति वाहन चालकों के लिए जानलेवा बन जाती है। कोर्ट ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए व्यवस्था सुधारने की आवश्यकता बताई।

प्रदेश के 10 ब्लैक स्पॉट पर चिंता

सुनवाई के दौरान प्रदेश के 10 सबसे खतरनाक सड़क दुर्घटना ब्लैक स्पॉट की सूची भी कोर्ट में प्रस्तुत की गई। इनमें सात स्थान रायपुर जिले के हैं। धरसींवा के सिलतरा-निको गेट मार्ग पर एक वर्ष में 19 लोगों की मौत हुई, जबकि कोरबा के पाली-गझरा नाला मार्ग पर 22 हादसों में 17 लोगों ने जान गंवाई। रायपुर के तेलीबांधा, नेवरा, आरंग और खरोरा क्षेत्र भी दुर्घटना संभावित स्थानों में शामिल हैं।

ओवरलोडिंग और अवैध पार्किंग पर भी उठाए सवाल

हाई कोर्ट ने औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ट्रकों की अवैध पार्किंग को भी दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया। अदालत ने कहा कि निर्धारित क्षमता से अधिक वजन लेकर वाहन चल रहे हैं, जबकि वजन जांचने वाली मशीनें कई स्थानों पर बंद पड़ी हैं। कोर्ट ने संबंधित विभागों को सड़क सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।