May 18, 2026

शादी का झांसा देकर बने संबंध हर बार दुष्कर्म नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court ने शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि महिला बालिग है और उसकी सहमति से संबंध बने हैं, तो हर स्थिति में इसे दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।

यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस N. K. Vyas की एकल पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपी को दी गई सजा को अवैध ठहराते हुए उसे बरी कर दिया। मामला Surguja district के धौरपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जिसमें करीब 20 साल बाद आरोपी को राहत मिली है।

पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ था प्रेम संबंध

अदालत में पेश रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2000 में सरगुजा जिले की एक युवती 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रही थी और धौरपुर क्षेत्र में किराए के मकान में रहती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात लीना राम ध्रुव से हुई, जो वहां पढ़ाई कर रहा था। दोनों के बीच दोस्ती हुई और बाद में यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया।

युवती का आरोप था कि 8 सितंबर 2000 को युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और इसके बाद करीब तीन साल तक दोनों के बीच संबंध बने रहे।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी 7 साल की सजा

मामले में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। बाद में Ambikapur District and Sessions Court ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 7 साल की सजा और 5000 रुपये जुर्माना लगाया था।

हाईकोर्ट ने पलटा फैसला

सत्र न्यायालय के फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि घटना के समय पीड़िता 26 वर्ष की बालिग महिला थी और उसे शारीरिक संबंधों के परिणामों की पूरी जानकारी थी। ऐसे में संबंध सहमति से बने माने जाएंगे।

हर मामला दुष्कर्म नहीं माना जाएगा

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल शादी का बहाना बनाकर बनाए गए संबंध हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माने जा सकते। यदि यह साबित नहीं होता कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का इरादा न रखते हुए सिर्फ शारीरिक शोषण के उद्देश्य से संबंध बनाए थे, तो ऐसे मामलों में दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं होगा।

करीब दो दशक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।