रायपुर। छत्तीसगढ़ के Udanti-Sitanadi Tiger Reserve में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। वन मंत्री Kedar Kashyap की पहल पर रिजर्व प्रबंधन ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांव ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूत करना और स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
पिछले चार वर्षों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग के अनुसार एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने, फलदार वृक्षों के संरक्षण और ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी पहल ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी संरक्षण प्रयासों की बड़ी वजह रही है।
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हैं। इनके प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र अब हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।
प्रस्तावित हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटक, पक्षी प्रेमी, वन्यजीव फोटोग्राफर और शोधकर्ता प्राकृतिक वातावरण में हॉर्नबिल का अवलोकन कर सकेंगे। सफारी संचालन के लिए प्रारंभिक चरण में दो जिप्सी वाहनों की व्यवस्था की गई है।
इस योजना की खास बात स्थानीय समुदायों की भागीदारी है। पीवीटीजी गांवों के युवाओं और ग्रामीणों को बर्ड वॉचिंग तथा नेचर गाइड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे पर्यटकों के लिए गाइड के रूप में कार्य करेंगे, जिससे उन्हें स्थायी आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
रायपुर से लगभग 130 किलोमीटर दूर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के प्रमुख बर्डिंग और नेचर टूरिज्म केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहां मालाबार पाइड हॉर्नबिल के अलावा शाहीन बाज, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। वहीं भारतीय विशाल गिलहरी और भारतीय विशाल उड़न गिलहरी जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी इस क्षेत्र की जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्नबिल सफारी संरक्षण, पर्यटन और ग्रामीण विकास के सफल संगम का उदाहरण बनेगी। इसके शुरू होने से छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और स्थानीय समुदायों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।





