रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के साथ ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। हाल की अच्छी बारिश से अभियान के तहत बनाई गई 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां और 700 से अधिक ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ सामुदायिक तालाब तेजी से पानी से भर रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ कृषि, सिंचाई, मत्स्य पालन और आजीविका गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के तहत 318 कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें 108 कार्य सीधे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से जुड़े हैं। इनसे वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का कहना है कि ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान के तहत प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिन पर महात्मा गांधी नरेगा के माध्यम से लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। राज्य सरकार का उद्देश्य इन संरचनाओं के जरिए जल सुरक्षा के साथ ग्रामीण विकास और रोजगार को भी स्थायी आधार प्रदान करना है।





