📍 Raipur News | Chhattisgarh Excise Policy 2026-27 | Liquor in Plastic Bottle
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की नई आबकारी नीति 2026–27 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब शराब कांच की बोतलों की जगह प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। यह अहम फैसला आज हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसे वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू किया जाएगा।
नई नीति के अनुसार अब सभी शराब निर्माता कंपनियों को अपने उत्पादों की पैकेजिंग प्लास्टिक बोतलों में करनी होगी। सरकार का कहना है कि इससे शराब दुकानों में टूट-फूट से होने वाले नुकसान और सुरक्षा जोखिमों में कमी आएगी।
🏛️ क्यों लिया गया यह फैसला?
आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार—
- कांच की बोतलों से हर साल भारी वित्तीय नुकसान होता है।
- टूटने से कर्मचारियों और ग्राहकों की सुरक्षा पर खतरा रहता है।
- प्लास्टिक बोतलों से भंडारण और परिवहन अधिक सुरक्षित होगा।
- लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और सप्लाई चेन मजबूत बनेगी।
अधिकारियों का कहना है कि इससे वितरण प्रणाली अधिक सरल और लचीली हो सकेगी।
🌱 पर्यावरण को लेकर उठे सवाल
हालांकि इस फैसले के साथ पर्यावरणीय चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि—
- प्लास्टिक उपयोग बढ़ने से कचरा प्रबंधन चुनौती बनेगा।
- माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का खतरा रहेगा।
सरकार का कहना है कि भविष्य में इसके दुष्प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए नियामक व्यवस्था और रीसाइक्लिंग सिस्टम विकसित किया जाएगा।
🗣️ आबकारी मंत्री लखन देवांगन का बयान
आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने कहा—
“आज की कैबिनेट बैठक में आबकारी विभाग का प्रस्ताव शामिल था। सालभर के लिए नियमों को कैबिनेट से अनुमोदन मिला है। बैठक में नई शराब दुकान खोलने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।”
⚖️ समझिए: प्लास्टिक बोतल में शराब के फायदे और नुकसान
✅ फायदे
- टूट-फूट से बचाव – कांच की तुलना में नुकसान कम।
- हल्की और ट्रांसपोर्ट में आसान – लागत घटेगी।
- सुरक्षा बेहतर – दंगों या आयोजनों में बोतल हथियार नहीं बनेंगी।
- स्टोरेज आसान – गोदाम प्रबंधन बेहतर होगा।
- लॉजिस्टिक्स खर्च कम – सप्लाई चेन मजबूत होगी।
❌ नुकसान
- स्वास्थ्य जोखिम – प्लास्टिक से केमिकल लीच होने की आशंका।
- स्वाद और गुणवत्ता पर असर – लंबे समय तक स्टोर करने पर फर्क पड़ सकता है।
- पर्यावरणीय नुकसान – प्लास्टिक कचरा और माइक्रोप्लास्टिक बढ़ेगा।
- नकली शराब का खतरा – प्लास्टिक बोतल की नकल आसान।
- ब्रांड वैल्यू पर असर – प्रीमियम ब्रांड की छवि प्रभावित हो सकती है।
- आग का खतरा – प्लास्टिक ज्वलनशील होता है।
🔍 अब सबकी नजरें इस पर
नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका असर—
- उपभोक्ताओं पर,
- शराब कारोबार पर,
- सरकारी राजस्व पर,
- और पर्यावरण पर कैसा पड़ता है।
छत्तीसगढ़ की आबकारी नीति में यह बदलाव राज्य के शराब कारोबार की दिशा बदल सकता है।





