September 4, 2026

CG News: स्थानीय मुद्रकों के विरोध के बाद 400 करोड़ की प्रिंटिंग निविदा निरस्त, सरकार ने लिया बड़ा फैसला

रायपुर। शासकीय मुद्रणालय की नई निविदा की कठोर पात्रता शर्तों को लेकर छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्रकों की आपत्ति आखिरकार रंग लाई है। प्रिंटिंग एंड स्टेशनरी विभाग ने 1 अगस्त को जारी नोटिस में करीब 400 करोड़ रुपये के सरकारी मुद्रण कार्यों से जुड़ी निविदा को अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

इससे पहले स्थानीय मुद्रकों की समस्या को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। निविदा की शर्तों को लेकर मुद्रकों ने सरकार के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए पात्रता नियमों को युक्तिसंगत बनाने की मांग की थी।

5 करोड़ टर्नओवर समेत कई कड़ी शर्तें

स्थानीय मुद्रकों के मुताबिक निविदा में भाग लेने के लिए कम से कम 5 करोड़ रुपये का वार्षिक टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन समेत कई तरह की मशीनों की अनिवार्यता और करीब 20 हजार वर्गफुट अधोसंरचना जैसी शर्तें रखी गई थीं। उनका कहना था कि इन शर्तों के कारण बड़ी संख्या में स्थानीय मुद्रण इकाइयां निविदा प्रक्रिया से बाहर हो रही थीं।

अन्य सरकारी संस्थाओं की निविदा से तुलना

मुद्रकों ने सवाल उठाया था कि छत्तीसगढ़ संवाद, छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम और शासकीय मुद्रणालय सभी सरकारी मुद्रण कार्य से जुड़े संस्थान हैं, लेकिन उनकी निविदाओं की पात्रता शर्तों में इतना बड़ा अंतर क्यों है।

उनका कहना था कि छत्तीसगढ़ संवाद की ‘अ’ श्रेणी की निविदा में अपेक्षाकृत सरल पात्रता के जरिए स्थानीय मुद्रण इकाइयों और छोटे उद्योगों को भी भाग लेने का अवसर मिलता है। ऐसे में शासकीय मुद्रणालय की निविदा में कठोर शर्तें लगाए जाने से स्थानीय उद्योगों के लिए प्रतिस्पर्धा का अवसर सीमित हो रहा था।

स्थानीय मुद्रकों को अब नई निविदा का इंतजार

स्थानीय मुद्रकों ने मांग की थी कि शासकीय मुद्रणालय की निविदा की पात्रता शर्तों को छत्तीसगढ़ संवाद की निविदा के अनुरूप युक्तिसंगत किया जाए, ताकि तकनीकी गुणवत्ता से समझौता किए बिना स्थानीय सक्षम मुद्रण इकाइयों को भी समान अवसर मिल सके।

अब निविदा निरस्त होने के बाद स्थानीय मुद्रकों को उम्मीद है कि नई निविदा जारी करते समय उनकी आपत्तियों को ध्यान में रखा जाएगा और ऐसी पात्रता शर्तें निर्धारित की जाएंगी, जिससे स्थानीय मुद्रण इकाइयों को भी सरकारी काम हासिल करने के लिए समान अवसर मिल सके।