रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन-जायदाद से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे के लिए राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग अगले माह से “राजस्व पखवाड़ा” आयोजित करेगा। विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने अप्रैल से जून तक 15-15 दिनों के विशेष अभियान चलाने के निर्देश सभी कलेक्टरों को दिए हैं।
गांव-गांव लगेंगे शिविर
राजस्व पखवाड़ा के तहत प्रत्येक जिले के गांवों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे मामलों का मौके पर ही समाधान किया जाएगा। सभी अधिकारियों को कार्रवाई की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
1.15 लाख से ज्यादा मामले लंबित
प्रदेश में वर्तमान में 1.15 लाख से अधिक राजस्व मामले लंबित हैं। इनमें अविवादित नामांतरण और सीमांकन के मामले सबसे ज्यादा हैं। इस अभियान का उद्देश्य इन मामलों का तेजी से निपटारा करना है।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
कलेक्टरों और तहसीलदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आम लोगों को अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर न कटवाए जाएं। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
गांव में ही मिलेगा समाधान
गांवों में शिविर लगने से किसानों और ग्रामीणों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए शहर नहीं आना पड़ेगा। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी।
45 दिनों में निपटारा अनिवार्य
अविवादित नामांतरण के मामलों को 45 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य किया गया है। राजस्व न्यायालय पोर्टल के जरिए अब सीधे सचिव स्तर से फाइलों की निगरानी की जाएगी।
प्रमुख जिलों में लंबित मामले
- रायपुर – 12,400
- बिलासपुर – 9,800
- दुर्ग – 7,500
- राजनांदगांव – 5,200
- कोरबा – 4,600
- रायगढ़ – 4,200
- बस्तर – 3,800
- जांजगीर – 3,700
- बलौदाबाजार – 3,500
- धमतरी – 3,100





