रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन खाद और उन्नत बीज की उपलब्धता को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। शून्यकाल में विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को किसान विरोधी बताते हुए खाद संकट, बीज की कमी और बिजली कटौती का मुद्दा उठाया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए गर्भगृह तक पहुंच गए, जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही के नियमों के अनुसार वे स्वतः निलंबित हो गए।
भूपेश बघेल ने उठाया किसानों का मुद्दा
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश के किसान खाद के लिए परेशान हैं। उनका आरोप था कि खाद का कोटा कम कर दिया गया है और कम बारिश के कारण बोनी भी प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है, जबकि निजी व्यापारियों के पास पर्याप्त स्टॉक है, जिससे किसानों का शोषण हो रहा है। उन्होंने बिजली कटौती का मुद्दा भी उठाया।
चरणदास महंत ने सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि डीएपी और पोटाश जैसे उर्वरकों की कमी से किसान परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कृषि विभाग के कुप्रबंधन के कारण किसान संकट झेल रहे हैं और कुछ व्यापारी खाद की कमी का फायदा उठाकर मनमानी कर रहे हैं।
मंत्री रामविचार नेताम ने किया बचाव
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में खाद और बीज की कोई कमी नहीं है।
उन्होंने बताया कि—
- प्रदेश में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य था, जिसके मुकाबले करीब 14 लाख मीट्रिक टन (लगभग 90 प्रतिशत) उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित की जा चुकी है।
- बीजों की मांग के मुकाबले 96 प्रतिशत भंडारण किया जा चुका है।
- डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके और सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है।
- पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 96 हजार मीट्रिक टन अधिक उर्वरक उपलब्ध कराया गया है।
- उर्वरकों के 94 नमूने अमानक पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने किया हंगामा
मंत्री के जवाब के बाद विपक्ष ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के विधायक भी नारे लगाने लगे, जिससे सदन का माहौल गरमा गया।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए विधानसभा के गर्भगृह (Well of the House) में पहुंच गए। विधानसभा की प्रक्रिया के तहत गर्भगृह में प्रवेश करने पर विपक्ष के विधायक स्वतः निलंबित हो गए।
निलंबन के बाद विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए। इससे विधानसभा की कार्यवाही के दौरान कुछ समय के लिए राजनीतिक गतिरोध की स्थिति बन गई।





