जगदलपुर के भानपुरी वन परिक्षेत्र में चिड़ियाघर बनाए जाने की खबर से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जमीन अधिग्रहण और विस्थापन की आशंका को लेकर खड़गा गांव सहित आसपास के कई गांवों के ग्रामीण धरना-प्रदर्शन पर उतर आए। स्थिति को देखते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज और नारायणपुर के पूर्व विधायक चंदन कश्यप भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1980 में कोसारटेडा बांध निर्माण के दौरान उन्हें विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा था, इसलिए किसी नए प्रोजेक्ट के नाम पर दोबारा विस्थापन की आशंका ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। इसी डर के चलते ग्रामीण चिड़ियाघर निर्माण का विरोध कर रहे थे।
हालांकि, वन विभाग ने चिड़ियाघर निर्माण और विस्थापन की खबरों को पूरी तरह भ्रामक बताया है। बस्तर वन मंडल के मुख्य वन संरक्षक आलोक तिवारी ने स्पष्ट किया कि भानपुरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का चिड़ियाघर बनाने की कोई योजना नहीं है। शासन की मंशा कोसारटेडा बांध के आसपास के वन क्षेत्रों को जोड़कर इको-टूरिज्म विकसित करने की है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना के तहत जल गतिविधियां, पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। वन विभाग ने साफ किया कि न तो भूमि अधिग्रहण का कोई प्रस्ताव है और न ही किसी रहवासी के विस्थापन की योजना। सभी गतिविधियां वन क्षेत्र की सीमा के भीतर ही की जाएंगी।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने और इको-टूरिज्म से जुड़ी योजनाओं को स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर के रूप में देखने की अपील की है।





