July 23, 2026

CGPSC सहायक प्राध्यापक भर्ती विवाद: हाईकोर्ट ने NOC मामले की जांच के दिए निर्देश, 120 दिन में फैसला होगा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2019 की सहायक प्राध्यापक (राजनीति शास्त्र) भर्ती में कथित अनियमितता के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। रायगढ़ निवासी अली हसन की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और CGPSC को मामले की जांच कर 120 दिनों के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला?

CGPSC ने वर्ष 2019 में राजनीति शास्त्र विषय के 59 सहायक प्राध्यापक पदों के लिए भर्ती निकाली थी। वर्ष 2021 में जारी अंतिम चयन सूची में अली हसन अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में पहले स्थान पर रहे थे।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि चयनित अभ्यर्थी रंजन तिवारी पहले से हरियाणा सरकार के उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, वे 13 फरवरी 2020 से हरियाणा के शासकीय महाविद्यालय, महेंद्रगढ़ में पदस्थ थे।

NOC नहीं देने का आरोप

याचिका में कहा गया है कि CGPSC के भर्ती विज्ञापन के अनुसार, किसी भी शासकीय या अर्द्धशासकीय सेवा में कार्यरत अभ्यर्थी के लिए नियुक्ति के समय अपने नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्रस्तुत करना अनिवार्य था।

अली हसन ने आरटीआई के माध्यम से शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भाटापारा से जानकारी मांगी, जिसमें बताया गया कि 23 मई 2022 को कार्यभार ग्रहण करने वाले रंजन तिवारी ने कार्यालय में कोई NOC प्रस्तुत नहीं किया था।

हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

मामले की सुनवाई 2 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने दलील दी कि चयनित अभ्यर्थी ने भर्ती की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया।

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि NOC प्रस्तुत नहीं किए जाने के आरोप की जांच आवश्यक है। कोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और CGPSC को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 120 दिनों के भीतर मामले की जांच पूरी कर विधि के अनुसार उचित निर्णय लिया जाए।