May 18, 2026

चैत्र नवरात्रि में डोली पर आएंगी माता रानी, 72 साल बाद विशेष ज्योतिषीय संयोग; 19 मार्च को कलश स्थापना

चैत्र नवरात्रि में डोली पर आएंगी माता रानी
राजनांदगांव। शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि की शुरुआत इस बार गुरुवार से होने के कारण माता रानी डोली पर सवार होकर आ रही हैं। शास्त्रों में डोली पर आगमन को महामारी या संघर्ष का प्रतीक माना जाता है, जो लोगों को सतर्क रहने का संदेश देता है। हालांकि माता रानी का प्रस्थान हाथी पर होगा, जिसे अत्यंत शुभ संकेत माना जाता है। हाथी पर गमन अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि, समृद्धि और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है।

72 साल बाद बन रहा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग
ज्योतिषाचार्य भोला पंडित के अनुसार करीब 72 वर्षों के बाद ऐसा दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है, जब अमावस्या तिथि के प्रभाव में ही कलश स्थापना की जाएगी। 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलने वाले इस नवरात्र पर्व में प्रतिपदा तिथि के क्षय होने के बावजूद पूरे नौ दिनों तक नवरात्रि मनाई जाएगी, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

घट स्थापना के समय विशेष योग का संयोग
हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी। हालांकि सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्र सम्मत विधि से उसी समय घट स्थापना का विधान रहेगा। इस दिन शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग बनेगा, जिसे भक्तों के लिए अत्यंत शुभ और मनोकामना पूर्ण करने वाला माना जा रहा है।

कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। पहला शुभ समय सुबह 6:02 से 8:40 बजे तक और दूसरा सुबह 9:16 से 10:56 बजे तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

नवरात्रि में सेवा पंडालों की तैयारी शुरू
नवरात्रि पर्व को देखते हुए दुर्ग के अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक हर साल की तरह इस बार भी सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। मंदिर समितियों और सेवादारों द्वारा इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक कर सेवा पंडालों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रूट सहित अन्य व्यवस्थाओं की तैयारी शुरू कर दी है।