May 18, 2026

छत्तीसगढ़ में नशे के खिलाफ सख्त अभियान, SOG और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स के गठन से तस्करों पर कसेगा शिकंजा

छत्तीसगढ़ में नशे की बढ़ती चुनौती
रायपुर। छत्तीसगढ़ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, प्राकृतिक संसाधनों और शांत सामाजिक जीवन के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में देश के अन्य हिस्सों की तरह यहां भी अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक स्थिति पैदा कर रही है। नशीले पदार्थ केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं हैं, बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।

सरकार का सख्त रुख और नई रणनीति
रायपुर। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान समूह (SOG) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के गठन का निर्णय लिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार के लिए कोई जगह नहीं है और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

नशे के सेवन से समाज पर पड़ रहा असर
रायपुर। देश की तरह छत्तीसगढ़ भी नशे की समस्या से जूझ रहा है। गांजा, चरस, हेरोइन, ब्राउन शुगर, अफीम, डोडा और सिंथेटिक ड्रग्स जैसे मादक पदार्थ समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। विभिन्न सर्वेक्षणों के अनुसार राज्य में लगभग 1.5 से 2 लाख लोग अफीम और इंजेक्टेबल ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं, जबकि 3.8 से 4 लाख लोग गांजा का उपयोग करते हैं। वहीं 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के 40 हजार से अधिक किशोर इनहेलेंट और कफ सिरप जैसी नशीली चीजों की चपेट में आ रहे हैं।

अभियानों में दिख रही सख्ती
रायपुर। राज्य सरकार के अनुसार मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पिछले 13 महीनों में 1,434 मामले दर्ज किए गए और 2,599 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान 20,089 किलोग्राम गांजा और 3,00,408 नशीली गोलियां व कैप्सूल जब्त किए गए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां नशे के नेटवर्क को तोड़ने में सक्रिय हैं।

साल 2025 में तेज हुआ अभियान
रायपुर। वर्ष 2025 में मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान और तेज किया गया। इस दौरान 1,288 मामले दर्ज हुए और 2,342 आरोपी गिरफ्तार किए गए। कार्रवाई के दौरान 16,999.7 किलोग्राम गांजा, 141 ग्राम ब्राउन शुगर, 1,259 ग्राम अफीम, 2.039 किलोग्राम हेरोइन, 27.68 ग्राम चरस, 23.56 ग्राम कोकीन, 70.46 ग्राम एमडीएमए, 1,524 किलोग्राम डोडा और 2,41,138 नशीली दवाएं जब्त की गईं।

2026 में भी जारी कार्रवाई
रायपुर। वर्ष 2026 की शुरुआत में भी नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी है। 31 जनवरी 2026 तक 146 मामले दर्ज किए गए और 257 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इस दौरान 3,090 किलोग्राम गांजा, 8.85 ग्राम ब्राउन शुगर, 277.2 ग्राम अफीम, 123.8 ग्राम हेरोइन, 15.29 किलोग्राम डोडा और 59,270 नशीली दवाएं बरामद की गईं।

SOG और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की भूमिका
रायपुर। राज्य सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध से निपटने के लिए संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में पुलिस मुख्यालय के अंतर्गत विशेष अभियान समूह (SOG) के गठन को मंजूरी दी गई है। यह समूह आतंकवादी खतरों और संगठित अपराधों से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण से लैस होगा।

10 जिलों में बनेगी एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स
रायपुर। नशे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्य के 10 जिलों में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया जा रहा है। इसके लिए 100 नए पदों को मंजूरी दी गई है। इससे खुफिया जानकारी जुटाने, तस्करी के नेटवर्क को पकड़ने और राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आर्थिक नेटवर्क पर भी कार्रवाई
रायपुर। सरकार ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर भी प्रहार शुरू किया है। वर्ष 2025 में 16 आरोपियों की करीब 13.29 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई। इसके अलावा 145 आदतन अपराधियों के खिलाफ PIT-NDPS कानून के तहत कार्रवाई की गई।

ड्रग्स से जुड़े उपकरणों पर भी निगरानी
रायपुर। सरकार ने नशे के इस्तेमाल से जुड़े उपकरणों की बिक्री पर भी सख्ती शुरू की है। रायपुर और दुर्ग में गोगो पाइप, स्मोकिंग कोन और रोलिंग पेपर जैसे उपकरणों की बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिससे नशे की आपूर्ति और उपयोग दोनों पर नियंत्रण किया जा सके।

जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे
रायपुर। नशे के खिलाफ लड़ाई में जनजागरूकता को भी प्राथमिकता दी जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में कार्यक्रम, गांवों में जनसभाएं और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। साथ ही “मानस” नाम से 1933 टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की गई है, जिसके जरिए नागरिक नशीले पदार्थों से जुड़ी गतिविधियों की सूचना दे सकते हैं।

तकनीक और सुशासन की दिशा में पहल
रायपुर। नशे के खिलाफ अभियान के साथ राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों पर भी काम कर रही है। कैबिनेट ने “क्लाउड फर्स्ट” डिजिटल नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत 2030 तक सभी सरकारी विभागों को सुरक्षित भारतीय क्लाउड सर्वरों पर स्थानांतरित किया जाएगा। साथ ही दूरस्थ क्षेत्रों में मोबाइल टावर लगाने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है।

नशा मुक्ति में समाज की भूमिका जरूरी
रायपुर। विशेषज्ञों का मानना है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं जीती जा सकती। इसमें परिवार, स्कूल और समाज की सक्रिय भूमिका भी जरूरी है। माता-पिता और शिक्षकों को युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना होगा, ताकि नशामुक्त समाज का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

नशामुक्त छत्तीसगढ़ का संकल्प
रायपुर। राज्य सरकार का कहना है कि नशे के कारोबार को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार ने सख्त कार्रवाई, जागरूकता और तकनीकी सुधारों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त राज्य बनाने का संकल्प लिया है।