September 4, 2026

छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं से किशोरों के फरार होने का मामला, हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बाल देखभाल संस्थाओं और आब्जर्वेशन होम से किशोरों के फरार होने की घटनाओं को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को आवश्यक पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से सुरक्षा व्यवस्था के लिए मांगी गई वित्तीय सहायता पर जवाब मांगा है।

26 संस्थाओं में तैनात होंगे 156 सुरक्षा गार्ड

राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ की 26 बाल देखभाल संस्थाओं में 156 सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मांगी गई है। राज्य सरकार ने 8 अगस्त को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पत्र भेजकर सुरक्षा गार्ड की तैनाती के लिए करीब 4.68 करोड़ रुपये सालाना बजट की मांग की है।

हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव को शपथपत्र दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि केंद्र की योजनाओं या दिशा-निर्देशों के तहत 156 सुरक्षा गार्ड की तैनाती के लिए राज्य को वित्तीय सहायता किस तरह उपलब्ध कराई जा सकती है।

महासमुंद और बिलासपुर में फरार हुए किशोर

दरअसल, महासमुंद के सरकारी आब्जर्वेशन होम से 8 किशोरों के फरार होने और बिलासपुर की बाल देखभाल संस्था से 4 किशोरों के भागने की घटनाओं के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इसके बाद राज्य सरकार ने संस्थाओं में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड की मांग की।

डिवीजन बेंच ने हाईकोर्ट रजिस्ट्री को केंद्र सरकार को मामले में आवश्यक पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है।

25 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव से वित्तीय सहायता से संबंधित स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होगी।