July 23, 2026

छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू, अवैध धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद 10 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। नए कानून का उद्देश्य बल, प्रलोभन, धोखाधड़ी या अन्य अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है। अधिनियम के तहत दोषियों के लिए कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

अवैध धर्मांतरण पर सख्त सजा

नए कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बल, लालच, धोखाधड़ी या अन्य अनुचित माध्यमों से धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 वर्ष तक के कारावास और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा हो सकती है।

यदि पीड़ित महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित है, तो दोषियों को 10 से 20 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है।

सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास

अधिनियम में सामूहिक धर्मांतरण के मामलों के लिए और भी कठोर प्रावधान किए गए हैं। ऐसे मामलों में दोषियों को आजीवन कारावास तथा 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

60 दिन पहले देनी होगी सूचना

कानून के तहत धर्म परिवर्तन करने से 60 दिन पहले संबंधित जिला कलेक्टर को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से हुई शादी हो सकेगी शून्य

अधिनियम में यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि किसी विवाह का उद्देश्य केवल धर्म परिवर्तन कराना पाया जाता है, तो ऐसी शादी को शून्य (अमान्य) घोषित किया जा सकेगा।

हर जिले में बनेंगी विशेष अदालतें

धर्मांतरण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश के प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों का गठन किया जाएगा। इन अदालतों को ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।