यपुर: Chhattisgarh विधानसभा में गुरुवार को Vijay Sharma ने छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पेश किया, जिस पर सदन में जमकर हंगामा हुआ। विपक्ष ने इस विधेयक का विरोध करते हुए इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की, लेकिन प्रस्ताव खारिज होने पर विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने से इनकार करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष Charandas Mahant ने विधेयक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसी तरह के मामले देश के कई राज्यों से जुड़े हुए Supreme Court of India में लंबित हैं, ऐसे में इस पर फिलहाल चर्चा नहीं होनी चाहिए और इसे प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए।
इस पर भाजपा विधायक Ajay Chandrakar ने कहा कि विधेयक पूरी तरह विधि सम्मत है और इसमें किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने जवाब देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस विषय पर कोई रोक (स्टे) नहीं है और राज्य सरकार को नया कानून बनाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के लिए पहले ही फीडबैक लिया जा चुका है और सभी को इस पर सहमति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रस्ताव खारिज, विपक्ष का बहिष्कार
आसंदी द्वारा नेता प्रतिपक्ष की आपत्ति को खारिज किए जाने के बाद विपक्ष नाराज हो गया और पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार कर सदन से बाहर निकल गया।
इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी कोई गंभीर मुद्दा आता है, विपक्ष बहिर्गमन कर देता है और इसे “पलायन” कहा जाना चाहिए।
इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच नारेबाजी शुरू हो गई और माहौल काफी गरमा गया। विपक्षी विधायक नारे लगाते हुए सदन से बाहर चले गए।





