July 23, 2026

डिजिटल हो रही छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था, व्हाट्सएप पर मिल रहे खसरा-बी-1; CM साय के सुशासन मॉडल पर फोकस

रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व सेवाओं को पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देते हुए अब किसानों और आम नागरिकों को खसरा, बी-1, ऋण पुस्तिका सहित अन्य राजस्व दस्तावेज व्हाट्सएप जैसे सरल माध्यम से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि इससे लोगों को तहसील और पटवारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है।

व्हाट्सएप पर मिल रहे राजस्व दस्तावेज

सरकार के अनुसार पहले भूमि संबंधी दस्तावेज प्राप्त करने में लोगों को लंबी प्रक्रिया और कई कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से ये दस्तावेज कुछ ही सेकंड में उपलब्ध हो रहे हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ने के साथ भ्रष्टाचार की संभावनाओं में भी कमी आई है।

‘वसुंधरा परियोजना’ से डिजिटल हो रहे रिकॉर्ड

राज्य सरकार की ‘वसुंधरा परियोजना’ के तहत सभी राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इसके लिए एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार तैयार किए जा रहे हैं, ताकि भूमि रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और उनमें किसी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना न रहे।

अटल डिजिटल सेवा केंद्रों से ग्रामीणों को राहत

प्रदेश की 6 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में संचालित अटल डिजिटल सेवा केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक भी आसानी से भूमि संबंधी दस्तावेज प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि यह पहल डिजिटल सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में मददगार साबित हो रही है।

समयबद्ध समाधान और जीरो टॉलरेंस नीति

राजस्व विभाग में नामांतरण, सीमांकन, मुआवजा और अन्य प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण के लिए सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। अधिकारियों को लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने और लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

ऑनलाइन होगी RBC 6-4 और फौती नामांतरण प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने RBC 6-4 के प्रकरणों के ऑनलाइन आवेदन और समयबद्ध निराकरण के निर्देश दिए हैं। वहीं, अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायत स्तर पर संचालित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधा मिल सके।

साइबर तहसील और डिजिटल नक्शा परियोजना

राज्य सरकार साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अविवादित नामांतरण और बंटवारा जैसी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। इसके अलावा धमतरी, अंबिकापुर और जगदलपुर में डिजिटल नक्शा परियोजना का पायलट कार्य भी शुरू किया जा चुका है।

किसानों के लिए योजनाओं की समीक्षा

सरकार स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टा, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री और डिजिटल क्रॉप सर्वे जैसी योजनाओं की नियमित समीक्षा कर रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों को तकनीक आधारित, पारदर्शी और तेज सेवाएं उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का कहना है कि इन पहलों के जरिए छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाया जा रहा है, ताकि आम लोगों को सेवाएं सरल और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो सकें।