रायपुर। भारत में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार अब केवल उद्योग और कर व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गए हैं। केंद्र सरकार अब शहरी नियोजन, भूमि उपयोग और निर्माण स्वीकृति प्रक्रियाओं को आधुनिक, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल बनाने पर जोर दे रही है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कई बड़े सुधार लागू करने की पहल शुरू कर दी है।
केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय द्वारा “Compliance Reduction and Deregulation Reforms” के तहत राज्यों को नई व्यवस्था अपनाने की सिफारिश की गई है। इसका उद्देश्य शहरों को अधिक निवेश-तैयार, लचीला और आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाना है, ताकि उद्योग, आवास और वाणिज्यिक विकास को नई गति मिल सके।
“जो प्रतिबंधित नहीं, वह अनुमति प्राप्त” मॉडल पर जोर
नई नीति के तहत “Demand-Driven Land Use System” लागू करने पर जोर दिया जा रहा है, जो “Everything is Permitted Unless Prohibited” सिद्धांत पर आधारित है। इसमें केवल प्रतिबंधित गतिविधियों की “Negative List” तय की जाएगी, जबकि बाकी सभी गतिविधियों को स्वतः अनुमति प्राप्त होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भूमि उपयोग परिवर्तन की जटिल प्रक्रियाएं कम होंगी और निवेशकों को अधिक स्पष्टता मिलेगी। त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने इस दिशा में पहल शुरू कर दी है।
छत्तीसगढ़ में Flexible Zoning और Mixed Land Use को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार ने भी शहरी नियोजन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के तहत “Flexible Zoning Framework” और “Mixed Land Use” को बढ़ावा दिया जा रहा है।
संशोधित प्रावधानों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों में रेड, ऑरेंज, ग्रीन और ब्लू श्रेणी के उद्योगों को नियंत्रित किया गया है, जबकि वाणिज्यिक क्षेत्रों में केवल रेड और ऑरेंज श्रेणी के उद्योगों पर प्रतिबंध रहेगा। उद्योगों का वर्गीकरण राज्य पर्यावरण संरक्षण मंडल के मानकों के अनुसार किया जाएगा।
इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए 60 वर्गमीटर तक के किफायती आवास निर्माण की अनुमति भी दी गई है। इससे “Walk to Work” जैसी अवधारणाओं को बढ़ावा मिलेगा और श्रमिकों को कार्यस्थल के पास आवास मिल सकेगा।
भूमि उपयोग परिवर्तन प्रक्रिया हुई सरल और डिजिटल
राज्य सरकार ने Change of Land Use (CLU) प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। नई अधिसूचना के तहत कई श्रेणियों की भूमि के व्यपवर्तन के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
इसके साथ ही ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम, सभी NOC को डिजिटल पोर्टल से जोड़ने और तय समय में स्वीकृति नहीं मिलने पर “Deemed Approval” जैसी व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी और परियोजनाओं की लागत कम आएगी।
MSME उद्योगों को बड़ी राहत
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए भी नियम आसान किए गए हैं। नए प्रावधानों के तहत 0.1 हेक्टेयर तक के गैर-प्रदूषणकारी ग्रीन और व्हाइट श्रेणी के उद्योगों के लिए न्यूनतम सड़क चौड़ाई 7.5 मीटर तय की गई है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों की स्थापना आसान होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
भवन अनुमति प्रणाली होगी पूरी तरह डिजिटल
राज्य सरकार ने ALBPMS सॉफ्टवेयर के माध्यम से भवन अनुमति प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। अब ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल हस्ताक्षरित भवन योजनाएं, Auto-DCR आधारित परीक्षण, ई-नोटिस और डिजिटल Completion व Occupancy Certificate जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके साथ ही Third Party Inspection और Self Certification व्यवस्था को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। नए नियमों के तहत निरीक्षण चार दिनों के भीतर और रिपोर्ट 48 घंटे में प्रस्तुत करनी होगी। समय सीमा में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने पर उसे “Deemed Approval” माना जाएगा।
छत्तीसगढ़ को मिल सकते हैं बड़े फायदे
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से छत्तीसगढ़ को दीर्घकालिक लाभ मिल सकते हैं। इससे उद्योग स्थापना की प्रक्रिया तेज होगी, निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और नियोजित शहरी विकास को गति मिलेगी।
इसके अलावा डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में निवेशक केवल प्रोत्साहनों को नहीं, बल्कि प्रक्रियाओं की गति और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता देंगे।





