July 23, 2026

छत्तीसगढ़ में 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध, उल्लंघन पर 25 हजार तक जुर्माना

रायपुर। मानसून के आगमन और मछलियों के प्राकृतिक प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक की अवधि को “बंद ऋतु (क्लोज सीजन)” घोषित किया है। इस दौरान प्रदेश की नदियों, नालों, प्राकृतिक जलाशयों तथा अन्य संबंधित जल स्रोतों में सभी प्रकार के मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

मत्स्य पालन विभाग के अनुसार, Chhattisgarh River Fisheries Act, 1972 की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत राज्य के सभी नदीय जल संसाधनों में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। इसका उद्देश्य वर्षा ऋतु में मछलियों के प्राकृतिक अंडजनन और वंश वृद्धि को संरक्षण प्रदान करना है, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

इन क्षेत्रों में रहेगा प्रतिबंध

विभागीय जानकारी के अनुसार प्रतिबंध राज्य की सीमा में आने वाली सभी नदियों, नालों, प्राकृतिक जलाशयों और अन्य नदीय जल स्रोतों पर लागू होगा। हालांकि ऐसे छोटे तालाब और जल स्रोत, जिनका संपर्क किसी नदी या नाले से नहीं है, उन्हें इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इसके अलावा बड़े जलाशयों में संचालित व्यावसायिक केज कल्चर गतिविधियां भी प्रतिबंध के दायरे से बाहर रहेंगी।

मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की पहल

अधिकारियों का कहना है कि वर्षा ऋतु मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान बड़े पैमाने पर मत्स्याखेट से मछलियों की संख्या प्रभावित होती है और जल स्रोतों की जैव विविधता पर भी असर पड़ता है। बंद ऋतु लागू होने से मछलियों के प्राकृतिक संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा और दीर्घकाल में राज्य के मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

राज्य सरकार ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित नए प्रावधानों तथा Chhattisgarh Jan Vishwas Act, 2025 के तहत Chhattisgarh Fisheries Area Act, 1948 की धारा 5 के अनुसार प्रतिबंध का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था पर 25 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं अवैध मत्स्याखेट करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

निगरानी और जनसहयोग पर जोर

राज्य शासन ने आम नागरिकों, मछुआरा सहकारी समितियों और मत्स्य व्यवसाय से जुड़े हितग्राहियों से नियमों का पालन करने की अपील की है। साथ ही सभी जिला अधिकारियों को नदी-नालों और जलाशयों की नियमित निगरानी एवं पेट्रोलिंग सुनिश्चित करने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।