May 18, 2026

छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ा विदेशी पर्यटकों का रुझान, 2025 में 820 सैलानियों ने की राज्य की यात्रा

रायपुर। प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, घने वन, झरनों और ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध छत्तीसगढ़ अब धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी पहचान बना रहा है। वर्ष 2025 के दौरान 820 विदेशी पर्यटकों ने छत्तीसगढ़ की यात्रा की, जो राज्य की अनछुई प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विविधता के प्रति बढ़ते वैश्विक आकर्षण का संकेत है।

राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा विकसित की जा रही आधुनिक पर्यटन सुविधाएँ तथा बेहतर होती सुरक्षा व्यवस्था आने वाले समय में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावनाओं को और मजबूत कर रही है।

छत्तीसगढ़ को “पर्यटकों का स्वर्ग” कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर और रतनपुर जैसे ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल, बस्तर की जनजातीय परंपराएँ और लोकनृत्य, सरगुजा के पर्वतीय क्षेत्र तथा जशपुर की हरित वादियाँ विदेशी पर्यटकों को एक अलग अनुभव प्रदान करती हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ उन पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है, जो प्रकृति के करीब रहकर स्थानीय संस्कृति को समझना चाहते हैं।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। प्रमुख पर्यटन स्थलों तक बेहतर सड़क संपर्क, पर्यटक सूचना केंद्रों की स्थापना, होटल और होम-स्टे सुविधाओं का विस्तार, पर्यटक मार्गदर्शकों का प्रशिक्षण, डिजिटल प्रचार-प्रसार और बुनियादी सुविधाओं के विकास जैसे प्रयासों से पर्यटकों को अधिक सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण पर्यटन, ईको-टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय समुदायों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

बस्तर बन रहा प्रमुख आकर्षण
बस्तर क्षेत्र विदेशी सैलानियों के लिए तेजी से उभरता पर्यटन गंतव्य बन रहा है। यहाँ के प्राकृतिक जलप्रपात, घने वन, राष्ट्रीय उद्यान, आदिवासी जीवन शैली और प्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसे सांस्कृतिक आयोजन पर्यटकों को अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं। चित्रकोट जलप्रपात के पास तीर्था गांव में प्रीमियम लक्जरी टेंट सिटी विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। “चित्रकोट इंडिजिनस नेचर रिट्रीट” परियोजना के माध्यम से चित्रकोट को वैश्विक स्तर के प्रकृति और संस्कृति पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है।

सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से बढ़ा विश्वास
बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव भी पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। क्षेत्र में शांति और विकास का वातावरण बनने से देशी और विदेशी पर्यटकों का विश्वास बढ़ा है, जिससे आने वाले वर्षों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मेंटर और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन की बस्तर की छह दिवसीय यात्रा ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दिलाई। उन्होंने बस्तर की जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवन शैली की सराहना करते हुए इसे विश्व के लिए एक अनूठा पर्यटन अनुभव बताया।

सरगुजा और जशपुर में भी अपार संभावनाएँ
सरगुजा के पर्वतीय वन क्षेत्र, मैनपाट का शांत वातावरण और जशपुर की हरित घाटियाँ भी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। इन क्षेत्रों में ईको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की संभावनाएँ तेजी से विकसित हो रही हैं।

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार, पर्यटन मेलों में भागीदारी, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रचार तथा पर्यटन अवसंरचना के विकास जैसे कई कदम उठा रहा है। स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक उत्सवों को पर्यटन से जोड़कर राज्य को एक विशिष्ट सांस्कृतिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता, बेहतर होती सुविधाएँ और सुरक्षित वातावरण के साथ छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में विदेशी सैलानियों के लिए एक आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में उभरने की ओर अग्रसर है।