रायपुर। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन किया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद नए नियम लागू हो गए हैं। सरकार का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाना, राजस्व बढ़ाना और खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है।
नए नियमों के तहत अवैध खनिज परिवहन और उत्खनन पर लगने वाले जुर्माने में भारी बढ़ोतरी की गई है। अब किसी भी मामले में समझौता राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन के मामलों में प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा परिवहन किए जा रहे खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे 70 हजार रुपये प्रशमन शुल्क के साथ खनिज का मूल्य भी जमा करना होगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का शुल्क और रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में प्रयुक्त वाहन और मशीनें दोबारा अपराध में उपयोग न हो सकें। अब जब्त वाहनों, मशीनों या अन्य सामग्री की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। इसके बाद ही वाहन छोड़ा जा सकेगा।
विकास कार्यों को गति देने के लिए उत्खनन अनुज्ञापत्र संबंधी नियमों में भी राहत दी गई है। शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है, जबकि अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त खनिज उपलब्ध होने के साथ व्यवस्थित खनन को बढ़ावा मिलेगा।
खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना विकास के लिए छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना की गई है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत इस न्यास में जमा होगा, जिससे प्रतिवर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्राप्त होने का अनुमान है।
सरकार ने खनन पट्टों के समामेलन की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है, जिससे विभिन्न प्रकार के स्वीकृत पट्टों के एकीकरण में आ रही व्यवहारिक कठिनाइयां दूर होंगी और शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा होगी।
इसके अलावा निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को एक समान किया गया है। अब सभी विभाग खनिज मूल्य के साथ रॉयल्टी, डीएमएफ, पर्यावरण उपकर और अन्य निर्धारित शुल्कों की कटौती करेंगे। रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस की जाएगी, अन्यथा इसे खनिज मद में जमा किया जाएगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अब गौण खनिज राजस्व का हिस्सा जिला पंचायतों को भी मिलेगा। वहीं लगभग 30 वर्षों बाद खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में बढ़ोतरी की गई है। सरकार का मानना है कि इससे केवल गंभीर पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे और निष्क्रिय खदानों को दोबारा नीलामी के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
सरकार का दावा है कि नए नियमों से अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगेगा, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी और खनिज संसाधनों के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता आएगी।





