रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन और भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से आयोजित ‘छत्तीसगढ़ इंडस्ट्री डायलॉग ऑन ग्रीन स्टील’ में प्रदेश को ₹13,840 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से राज्य में करीब 10,921 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
स्टील उत्पादन के साथ वैल्यू एडिशन पर जोर
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि स्टील और खनन छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान की मजबूत नींव हैं। अब इसी आधार पर औद्योगिक विकास को नई दिशा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल स्टील उत्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि स्टील का अधिकतम मूल्य संवर्धन प्रदेश के भीतर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का स्टील प्राथमिक रूप में बाहर भेजने के बजाय यहीं ऑटो कम्पोनेंट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, रेलवे, रक्षा और सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे डाउनस्ट्रीम एवं स्पेशियलिटी उत्पादों में परिवर्तित किया जाना चाहिए। इससे प्रदेश में ही निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
ग्रीन स्टील की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से शून्य कार्बन उत्सर्जन की दिशा में आगे बढ़ रही है और ग्रीन स्टील की मांग लगातार बढ़ रही है। छत्तीसगढ़ ने भी इस बदलाव को समय रहते अपनाया है।
प्रदेश में 26 हजार मेगावाट से अधिक विद्युत उपलब्धता और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक बिजली दरें ऊर्जा आधारित डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के लिए राज्य को अनुकूल बनाती हैं।
18 महीनों में मिले करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के बाद निवेश के नए अवसर खुले हैं। पिछले 18 महीनों में प्रदेश को करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
इनमें स्टील और खनन के अलावा AI एवं डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मास्यूटिकल, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे नए क्षेत्रों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर सरकार का फोकस
निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कारोबारी प्रक्रियाओं में सुधार किए गए हैं। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट’ लागू किया है।
इसके तहत कम जोखिम वाले उद्यमों के लिए स्व-प्रमाणीकरण, जोखिम आधारित नियामकीय व्यवस्था और निर्धारित समय-सीमा में आवेदन का निराकरण नहीं होने पर डीम्ड अप्रूवल जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इन सुधारों से प्रदेश के करीब 15 लाख MSME को लाभ मिलने की उम्मीद है।
नए जिलों में औद्योगिक पार्क
राज्य सरकार औद्योगिक विकास को रायपुर-भिलाई क्षेत्र से आगे अन्य जिलों तक पहुंचाने की दिशा में भी काम कर रही है। राजनांदगांव, धमतरी, जांजगीर-चांपा और बस्तर में चार नए औद्योगिक पार्क स्वीकृत किए गए हैं।
वहीं राजनांदगांव में करीब 306 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है। इससे बड़े निवेश के साथ करीब 9 हजार रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
निवेशकों को मुख्यमंत्री का न्योता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने निवेशकों को छत्तीसगढ़ में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि राज्य की नीतियां स्पष्ट और प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं। उन्होंने कहा कि अनुमतियां तय समय-सीमा में देने की दिशा में काम किया जा रहा है और निवेशकों के लिए रेड टेप की कोई जगह नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रीन स्टील और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग के जरिए छत्तीसगढ़ अपनी खनिज संपदा को प्रदेश के भीतर ही अधिक मूल्य, निवेश और रोजगार में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।





