रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले दो वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार किए हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य समय पर पहचान, रोकथाम और गुणवत्तापूर्ण सेवा सुनिश्चित करना है।
मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानव संसाधन होता है। इसी सोच के तहत पिछले दो वर्षों में डीएचएस और एनएचएम के तहत 1639 पदों पर नियुक्ति की गई है, जबकि 2300 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती ऑनलाइन माध्यम से हर माह की जा रही है।
अधोसंरचना में सुधार:
प्रदेश में स्वास्थ्य संस्थानों की संख्या और क्षमता में काफी वृद्धि की गई है। पिछले दो वर्षों में स्वीकृत किए गए प्रमुख संस्थान हैं:
- 3 जिला अस्पताल
- 2 सिविल अस्पताल (220 बिस्तर)
- 8 सिविल अस्पताल (100 बिस्तर)
- 1 मानसिक अस्पताल (200 बिस्तर, सेन्दरी)
- 1 MCH अस्पताल
- 6 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
- 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
- 34 उप स्वास्थ्य केंद्र
इसके अतिरिक्त, 12 IPHL लैब, 31 BPHU और 1 क्रिटिकल हेल्थ केयर ब्लॉक स्थापित किए गए। आगामी तीन वर्षों में प्रदेश के सभी विकासखंडों में BPHU और जिला अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में IPHL लैब स्थापित की जाएगी।
आयुष्मान भारत और मोबाइल स्वास्थ्य सेवाएं:
प्रदेश के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पिछले दो वर्षों में लगभग 3 लाख आरोग्य मेले आयोजित किए गए। इन मेले में उपचार के साथ वेलनेस सुविधाएं भी प्रदान की गई। इसके अलावा 75 हाट बाजार मोबाइल मेडिकल यूनिट, 375 एम्बुलेंस और 30 रूरल मोबाइल मेडिकल यूनिट जल्द ही शुरू की जाएंगी।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पिछले दो वर्षों में 31.44 लाख से अधिक क्लेम प्रकरणों में 4551 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। राज्य के 90 प्रतिशत राशन कार्डधारकों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जिनमें से 38.98 लाख कार्ड पिछले दो वर्षों में जारी किए गए। मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत 2273 लाभार्थियों को 62.20 करोड़ रुपये का उपचार प्रदान किया गया।
गुणवत्ता सुधार और डिजिटल पहल:
नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस प्रोग्राम (NQAS) के तहत 884 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का गुणवत्ता प्रमाणीकरण किया गया। रायपुर और बलौदाबाजार जिला अस्पताल की IPHL लैब को केंद्र सरकार से गुणवत्ता प्रमाणन मिला। टेली-मेडिसिन सेवा के माध्यम से 2 लाख से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं, जिससे दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंच सकीं।
नॉन-कमीनिकेबल रोग और टीकाकरण:
गैर संचारी रोगों की जांच में 80 लाख से अधिक नागरिकों की BP और शुगर जांच और 20 लाख लोगों की कैंसर जांच की गई। टीकाकरण का लक्ष्य 94 प्रतिशत से अधिक हासिल किया गया। कुपोषित बच्चों की संख्या कम करने के लिए 21,164 बच्चों को पोषण और उपचार प्रदान किया गया।
टीबी, मलेरिया और सिकल सेल पर नियंत्रण:
12 लाख से अधिक टीबी संदिग्ध मरीजों की जांच की गई और 4106 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। मलेरिया पॉजिटिविटी दर 4.6 प्रतिशत से घटकर 0.59 प्रतिशत हुई। सिकल सेल स्क्रीनिंग में 1.68 करोड़ लोगों की जांच की गई, जिनमें 27,396 मरीज चिन्हित किए गए।
स्वास्थ्य मंत्री का संदेश:
श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, मजबूत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के प्रयास जारी रहेंगे। उनका लक्ष्य केवल बीमारियों का इलाज नहीं, बल्कि आम जनता को समय पर, भरोसेमंद और पारदर्शी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, डिजिटल सुविधा और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।





