July 23, 2026

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था ‘वेंटिलेटर’ पर, 16 पन्नों के पत्र में सिविल सोसाइटी ने मुख्य सचिव से मांगी तत्काल भर्ती

रायपुर। छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने प्रदेश की बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मुख्य सचिव को 16 पन्नों का विस्तृत पत्र भेजा है। पत्र में शासकीय मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों, चिकित्सा विशेषज्ञों और शैक्षणिक स्टाफ के हजारों रिक्त पदों को तत्काल नियमित भर्ती के माध्यम से भरने की मांग की गई है।

सिविल सोसाइटी का दावा है कि प्रदेश के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहे हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत स्वीकृत पदों के मुकाबले आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं, जिससे मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई दोनों प्रभावित हो रही हैं।

पत्र के अनुसार राज्य में सीनियर रेजिडेंट (SR) के 518 स्वीकृत पदों में से 375 पद रिक्त हैं, यानी 72.3 प्रतिशत पद खाली हैं। वहीं असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर श्रेणी में भी करीब 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है।

संगठन ने बताया कि प्रदेश में चिकित्सा विशेषज्ञों के 1773 स्वीकृत पदों में केवल 355 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 1418 पद खाली हैं। यानी करीब 80 प्रतिशत विशेषज्ञ पद रिक्त हैं। सुकमा और मोहला-मानपुर जैसे संवेदनशील जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या शून्य बताई गई है।

पत्र में यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में 17 हजार से अधिक डॉक्टर पंजीकृत हैं, जिनमें 11,132 एमबीबीएस, 2,850 एमडी, 2,740 एमएस और 420 सुपर स्पेशलिस्ट शामिल हैं। इसके बावजूद वर्ष 2020 के बाद से सीजीपीएससी के माध्यम से नियमित भर्ती नहीं होने से सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है।

सिविल सोसाइटी ने इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाले 530 रुपये प्रतिदिन मानदेय और बांडेड डॉक्टरों को मिलने वाले 49 हजार रुपये मासिक मानदेय को भी अपर्याप्त बताया है। संगठन का कहना है कि कम वेतन और कठोर बॉण्ड नीति के कारण युवा डॉक्टर प्रदेश छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।

पत्र में कांकेर और राजनांदगांव मेडिकल कॉलेजों की अव्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया गया है। कांकेर मेडिकल कॉलेज में कई महत्वपूर्ण विभागों में फैकल्टी नहीं होने और छात्रों के लिए हॉस्टल सुविधा के अभाव का मुद्दा उठाया गया है। वहीं राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में कई विभाग बिना विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर के संचालित होने की बात कही गई है।

सिविल सोसाइटी ने सरकार से सीजीपीएससी के माध्यम से नियमित भर्ती शुरू करने, ग्रामीण सेवा करने वाले डॉक्टरों को बोनस अंक देने, इंटर्न और बांडेड डॉक्टरों का मानदेय बढ़ाने, दूरस्थ मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाएं सुधारने तथा सरकारी अस्पतालों में किडनी, लीवर और हार्ट ट्रांसप्लांट जैसी सुपर स्पेशलिटी सेवाएं शुरू करने की मांग की है।

संगठन का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू किए बिना प्रदेश की जनता को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।