April 15, 2026

मूक-बधिर गवाह की गवाही भी मान्य: हाईकोर्ट ने दुष्कर्मी को उम्रकैद बरकरार रखी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि केवल मूक-बधिर होने के आधार पर किसी गवाह की गवाही को खारिज नहीं किया जा सकता। संकेतों के माध्यम से दी गई जानकारी भी कानूनी रूप से मौखिक साक्ष्य मानी जाएगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने दुष्कर्म के दोषी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई है।

मामला बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र का है, जहां 29 जुलाई 2020 को 19 वर्षीय मूक-बधिर युवती के साथ उसके रिश्तेदार नीलम कुमार देशमुख ने दुष्कर्म किया था। घटना के समय युवती घर पर अकेली थी। शाम को मां के लौटने पर पीड़िता ने इशारों में पूरी घटना बताई, जिसके बाद मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

सुनवाई के दौरान पीड़िता की गवाही दर्ज करना चुनौतीपूर्ण था। कोर्ट ने साइन लैंग्वेज एक्सपर्ट की मदद ली और प्लास्टिक की गुड़िया के माध्यम से पीड़िता ने संकेतों में घटना का विवरण प्रस्तुत किया। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया था।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है, जिसे मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट से भी पुष्टि मिली है। कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376(2) के तहत आजीवन कारावास (मृत्यु तक) और धारा 450 के तहत 5 साल की सजा के साथ 21 हजार रुपए जुर्माना लगाया है।